राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 16 मई 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 खत्म होने के बाद अब राजनीतिक लड़ाई कानूनी मोर्चे पर पहुंचती दिखाई दे रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोलकाता के बिधाननगर नॉर्थ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने, राजनीतिक वैमनस्य बढ़ाने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर विवादित टिप्पणियां करने के आरोप लगाए गए हैं। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और चुनावी मुकाबले की गर्मी अब कानूनी और राजनीतिक टकराव में बदलती नजर आ रही है।एफआईआर के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार ने 5 मई को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अभिषेक बनर्जी ने 27 अप्रैल से 3 मई के बीच कई चुनावी सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ऐसे बयान दिए, जिनसे राजनीतिक तनाव और सामाजिक वैमनस्य बढ़ सकता था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को कई वीडियो लिंक और भाषणों के रिकॉर्ड भी सौंपे हैं। आरोप है कि इन भाषणों में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया गया और कुछ टिप्पणियां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी की गईं, जिन्हें “उत्तेजक” और “धमकीपूर्ण” बताया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा था कि “बंगाल को दिल्ली से डराकर नहीं चलाया जा सकता” और “अगर बीजेपी सत्ता के दम पर एजेंसियों का इस्तेमाल करेगी तो जनता जवाब देगी।” एक सभा में उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि बीजेपी चुनाव को “ध्रुवीकरण और डर” के जरिए प्रभावित करना चाहती है। शिकायत में दावा किया गया है कि कुछ भाषणों में उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को “सड़क पर जवाब देने” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे शिकायतकर्ता ने भड़काऊ बताया है।
इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान डीजे और जुलूसों को लेकर की गई उनकी टिप्पणियां भी विवाद का हिस्सा बनीं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने राजनीतिक माहौल को और उग्र बनाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सार्वजनिक शांति प्रभावित हो सकती थी। हालांकि TMC नेताओं का कहना है कि उनके बयान राजनीतिक भाषण का हिस्सा थे और उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। एफआईआर में कहा गया है कि चुनावी माहौल के दौरान दिए गए भाषण सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते थे। मामले की जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर सोमनाथ सिंहा रॉय को सौंपी गई है। हालांकि अभी तक अभिषेक बनर्जी की ओर से विस्तृत कानूनी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के भीतर इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल चुनाव के बाद शुरू हुए नए राजनीतिक संघर्ष का संकेत है। विधानसभा चुनाव में TMC और बीजेपी के बीच बेहद आक्रामक प्रचार अभियान चला था, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर तीखे व्यक्तिगत और राजनीतिक हमले किए थे। अब चुनाव खत्म होने के बाद भी बयानबाजी और आरोपों का दौर थमता नजर नहीं आ रहा।
अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद TMC का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। वह लगातार बीजेपी और केंद्र सरकार पर हमलावर रहे हैं। दूसरी ओर बीजेपी लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि TMC के कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए “उत्तेजक भाषा” और “डर की राजनीति” का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह एफआईआर आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को और ज्यादा टकरावपूर्ण बना सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। TMC समर्थक इसे विपक्षी आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि बीजेपी समर्थकों का कहना है कि किसी भी नेता को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बंगाल में अब चुनावी राजनीति केवल मतदान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अदालत, जांच एजेंसियां, एफआईआर और कानूनी लड़ाइयां भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनती जा रही हैं।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव खत्म जरूर हो गया है, लेकिन उसकी राजनीतिक गर्मी अभी ठंडी नहीं हुई है। चुनावी मंच से शुरू हुई बयानबाजी अब पुलिस स्टेशन और अदालतों तक पहुंच चुकी है, और यही वजह है कि बंगाल की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गई है।



