टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/नई दिल्ली | 14 मई 2026
Iran अब केवल तेल और सामरिक जलमार्गों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर “डिजिटल टोल” लगाने की योजना पर काम कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो Meta, Google, Microsoft और Amazon जैसी बड़ी टेक कंपनियों को भारी शुल्क देना पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाली इंटरनेट केबलों के जरिए राजस्व कमाया जाए। इन केबलों के माध्यम से दुनिया का 99 प्रतिशत से अधिक अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता है।
ईरानी मीडिया में सामने आई योजनाओं के अनुसार, सरकार तीन चरणों में नई नीति लागू कर सकती है। इसके तहत विदेशी टेक कंपनियों से ट्रांजिट टैक्स या वार्षिक शुल्क लिया जा सकता है। साथ ही कंपनियों को ईरानी कानूनों के तहत काम करने और डेटा संचालन में स्थानीय नियम मानने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान यह नीति लागू करता है तो वैश्विक इंटरनेट सेवाओं की लागत बढ़ सकती है। कंपनियां अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए क्लाउड स्टोरेज, स्ट्रीमिंग और डिजिटल सेवाओं के सब्सक्रिप्शन महंगे कर सकती हैं। इससे आम इंटरनेट यूजर्स को भी सीधा आर्थिक असर झेलना पड़ सकता है।
तकनीकी विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला डेटा ट्रैफिक महंगा या कानूनी रूप से जोखिमपूर्ण हो गया, तो कंपनियों को इंटरनेट डेटा को लंबी वैकल्पिक समुद्री रूट्स से भेजना पड़ेगा। इससे इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है, ऑनलाइन गेमिंग में लेटेंसी बढ़ सकती है और 4K वीडियो स्ट्रीमिंग जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान समुद्र के नीचे बिछी केबलों की मरम्मत और रखरखाव पर स्थानीय नियंत्रण चाहता है। इससे अंतरराष्ट्रीय डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर नई बहस छिड़ सकती है। टेक कंपनियों को आशंका है कि डेटा ट्रैफिक स्थानीय निगरानी या डेटा शेयरिंग नियमों के दायरे में आ सकता है।
Strait of Hormuz पहले ही वैश्विक तेल व्यापार का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। अब इंटरनेट केबलों को लेकर ईरान की यह रणनीति दुनिया के डिजिटल ढांचे को भी भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र में ला सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, ईरान की यह पहल केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। तेहरान वैश्विक इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ाकर पश्चिमी देशों और बड़ी टेक कंपनियों पर दबाव बनाने की क्षमता विकसित करना चाहता है।



