राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई/चेन्नई | 8 मई 2026
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी खींचतान के बीच शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद संजय राउत ने बीजेपी और राज्यपाल की भूमिका पर जोरदार व्यंग्य किया है। राउत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर लोकतंत्र के नियम हर राज्य में अलग-अलग होने हैं, तो फिर सीधे बीजेपी को ही सरकार बनाने के लिए बुला लिया जाए और “बहुमत साबित करने के लिए अगले पांच साल का समय” भी दे दिया जाए। संजय राउत का यह बयान उस समय आया है जब तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी TVK सरकार गठन का दावा कर रही है, लेकिन राज्यपाल की ओर से अभी तक सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं दिया गया है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि संवैधानिक पदों का इस्तेमाल राजनीतिक सुविधा के हिसाब से किया जा रहा है।
राउत ने कहा कि जब कर्नाटक में बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, तब रातों-रात सरकार बनाने का न्योता दे दिया गया था। फ्लोर टेस्ट के लिए लंबा समय भी मिल गया था। लेकिन अब तमिलनाडु में अचानक संविधान की किताब का नया संस्करण निकाल लिया गया है, जिसमें पहले 118 विधायकों की “लाइन लगाओ”, तब सरकार बनाने की बात होगी।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लगता है अब राजभवन लोकतंत्र से नहीं, कैलकुलेटर से चल रहा है। जहां बीजेपी हो, वहां संख्या बाद में गिनी जाती है और जहां विपक्ष हो, वहां हर विधायक की गिनती एक्स-रे मशीन से होती है।”
संजय राउत ने कहा कि देश में अब “दो तरह का लोकतंत्र” चल रहा है। एक वह, जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी हो तो राज्यपाल तुरंत दरवाजा खोल देते हैं, और दूसरा वह, जहां विपक्ष सबसे बड़ा दल हो तो राजभवन का गेट ही बंद हो जाता है।
उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता ने कई बार देखा है कि कैसे आधी रात में शपथ ग्रहण हो जाते हैं, कैसे सुबह होते-होते सरकारें बन जाती हैं और कैसे संवैधानिक पदों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रबंधन के लिए किया जाता है। राउत बोले, “जब बीजेपी को समर्थन के बिना सरकार बनाने का मौका मिल सकता है, तो तमिलनाडु में TVK को मौका देने में डर किस बात का है?”
राउत ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “अगर नियम यही है कि पहले पूरा बहुमत लेकर आओ, तब सरकार बनाओ, तो फिर देश के कई पुराने मुख्यमंत्री कभी शपथ ही नहीं ले पाते। अल्पमत सरकारें क्या संविधान से बाहर थीं?”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। सोशल मीडिया पर भी संजय राउत का बयान तेजी से वायरल हो रहा है। विपक्षी दल इसे “संविधान बनाम राजनीति” की लड़ाई बता रहे हैं, जबकि बीजेपी नेताओं ने राउत के बयान को “हताशा की राजनीति” करार दिया है।
तमिलनाडु का सियासी संकट अब सिर्फ सरकार गठन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग संवैधानिक मानदंड लागू किए जा रहे हैं।




