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TVK चीफ विजय को शपथ न दिलाने पर कपिल सिब्बल की नाराज़गी, बोले — गवर्नर नहीं, बीजेपी के एजेंट बन चुके हैं…

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/चेन्नई | 8 मई 2026

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी संग्राम अब और ज्यादा तीखा हो गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने TVK प्रमुख विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ न दिलाए जाने पर राज्यपाल पर जोरदार हमला बोला है। सिब्बल ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि “देश के ज्यादातर गवर्नर अब संवैधानिक पद पर नहीं, बल्कि बीजेपी के राजनीतिक एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।”

कपिल सिब्बल का यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी TVK लगातार सरकार बनाने का दावा कर रही है, लेकिन राज्यपाल की ओर से अब तक विजय को सरकार गठन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं।

सिब्बल ने कहा कि संविधान साफ कहता है कि सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए और बहुमत साबित करने की प्रक्रिया विधानसभा के फ्लोर पर होती है, राजभवन के बंद कमरों में नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बीजेपी किसी राज्य में बहुमत से दूर होती है, तब राज्यपाल रातों-रात शपथ दिला देते हैं, लेकिन जहां विपक्ष मजबूत होता है, वहां अचानक संवैधानिक नैतिकता की बातें शुरू हो जाती हैं।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “अगर बीजेपी को 15 दिन देकर बहुमत जुटाने का मौका दिया जा सकता है, तो विजय को शपथ दिलाने में डर किस बात का है? क्या संविधान अब पार्टी देखकर लागू होगा?”

कपिल सिब्बल ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि देश ने पहले भी देखा है कि कैसे अल्पमत में होने के बावजूद बीजेपी नेताओं को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। उन्होंने कहा कि उस समय राज्यपालों को बहुमत की चिंता नहीं थी, लेकिन अब तमिलनाडु में अचानक 118 विधायकों की “परेड” मांगी जा रही है।

सिब्बल बोले, “यह लोकतंत्र नहीं, राजनीतिक चयनात्मकता है। राज्यपाल अगर केंद्र सरकार के राजनीतिक निर्देशों पर काम करेंगे, तो फिर संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा कैसे बचेगा?”

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष अब इस मुद्दे को सिर्फ तमिलनाडु का मामला नहीं मान रहा, बल्कि इसे संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक परंपराओं की लड़ाई के तौर पर देख रहा है। उनके मुताबिक, यदि सबसे बड़ी पार्टी को मौका नहीं दिया जाता, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ होगा।

TVK समर्थकों और विपक्षी दलों ने कपिल सिब्बल के बयान का समर्थन किया है। सोशल मीडिया पर भी “Governor vs Democracy” और “Invite Vijay” जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। दूसरी ओर बीजेपी नेताओं ने सिब्बल के बयान को “राजनीतिक ड्रामा” बताते हुए खारिज कर दिया है।

तमिलनाडु का सियासी संकट अब केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं रह गया है। यह लड़ाई अब संविधान, राज्यपाल की भूमिका और लोकतांत्रिक परंपराओं पर सीधी बहस में बदलती नजर आ रही है।

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