Home » Opinion » समझें कि ममता ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया और महाराष्ट्र की राजनीति से क्या सबक मिला?

समझें कि ममता ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया और महाराष्ट्र की राजनीति से क्या सबक मिला?

ओपिनियन | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 मई 2026

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है कि अगर चुनाव परिणाम ममता बनर्जी के खिलाफ गए हैं तो उन्होंने अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया? बहुत से लोगों को यह राजनीतिक जिद या सत्ता से चिपके रहने की कोशिश लग सकती है, लेकिन भारतीय संविधान, विधानसभा की प्रक्रिया और पिछले राजनीतिक उदाहरणों को देखें तो मामला इतना सीधा नहीं है। राजनीति सिर्फ नैतिकता से नहीं, कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं से भी चलती है। और शायद यही वजह है कि ममता बनर्जी फिलहाल इस्तीफा देने से बच रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए महाराष्ट्र की राजनीति का उदाहरण बेहद महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र में जब Uddhav Thackeray की सरकार थी, तब अचानक Eknath Shinde कई विधायकों के साथ अलग हो गए। उस समय राजनीतिक माहौल ऐसा बनाया गया कि सरकार गिर चुकी है। दबाव बढ़ा, राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और अंततः उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। वहां एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल उठा—क्या सिर्फ विधायकों के अलग हो जाने से सरकार गिर जाती है? जवाब था—नहीं। जब तक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट न हो और बहुमत साबित न हो जाए, तब तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहते हैं।

बाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान तत्कालीन चीफ जस्टिस D. Y. Chandrachud की बेंच ने यह टिप्पणी की थी कि उद्धव ठाकरे ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया था, इसलिए उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री पद पर बहाल नहीं किया जा सकता। इसका सीधा अर्थ यह था कि अगर उन्होंने इस्तीफा न दिया होता और फ्लोर टेस्ट का इंतजार किया होता, तो कानूनी स्थिति अलग हो सकती थी। यही वह सबसे बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक सबक है, जिसे आज ममता बनर्जी शायद ध्यान में रख रही हैं।

महाराष्ट्र में ही एक और उदाहरण देखने को मिला था। विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। उस समय Ajit Pawar ने बीजेपी नेतृत्व से संपर्क किया और समर्थन का दावा किया। रातों-रात राजनीतिक समीकरण बदले, सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हुई और बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनाने की कोशिश शुरू हो गई। यहां तक कि अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी दिला दी गई। लेकिन अगले ही दिन Sharad Pawar सामने आए और साफ कहा कि पार्टी का असली समर्थन उनके साथ है। उन्होंने फ्लोर टेस्ट की मांग की। जब बहुमत साबित करने की बारी आई, तो पूरा समीकरण बदल गया और अंततः उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनी।

यानी भारतीय राजनीति में अंतिम फैसला सिर्फ मीडिया नैरेटिव या राजनीतिक दावों से नहीं होता, बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर तय होता है। शायद यही वजह है कि ममता बनर्जी अभी इस्तीफा देने के बजाय संवैधानिक प्रक्रिया का इंतजार करना चाहती हैं।

इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सुप्रीम कोर्ट में चल रही प्रक्रिया से जुड़ा है। ममता बनर्जी पहले ही चुनाव प्रक्रिया को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। जिन लोगों के वोट काटे जाने, चुनावी गड़बड़ियों और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे, उन्हें लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप तो नहीं किया, क्योंकि चुनाव आयोग भी एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन सुनवाई के दौरान कई गंभीर सवाल जरूर उठे थे। अदालत में यह भी कहा गया था कि यदि जिन क्षेत्रों में वोट काटे गए, वहां जीत-हार का अंतर उतना ही निकला तो स्थिति क्या होगी? यह सवाल आज भी राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में है।

ऐसे में यदि ममता बनर्जी खुद इस्तीफा दे देती हैं, तो भविष्य में किसी भी संभावित न्यायिक हस्तक्षेप, जांच या पुनर्विचार की संभावना काफी कमजोर पड़ सकती है। संवैधानिक रूप से यह माना जा सकता है कि उन्होंने स्वयं हार स्वीकार कर ली। यही कारण है कि वह शायद आखिरी संवैधानिक प्रक्रिया तक इंतजार करना चाहती हैं।

राजनीति में कई बार प्रतीकात्मक फैसले भावनात्मक रूप से सही लगते हैं, लेकिन कानूनी रूप से वही फैसले भविष्य के सारे रास्ते बंद कर देते हैं। उद्धव ठाकरे के मामले से यह बात साफ हो चुकी है। ममता बनर्जी शायद वही गलती दोहराना नहीं चाहतीं।

हो सकता है अंततः उन्हें पद छोड़ना पड़े। हो सकता है राज्यपाल किसी और को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें। लेकिन जब तक संवैधानिक और न्यायिक संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हो जातीं, तब तक उनका पद पर बने रहना सिर्फ राजनीतिक जिद नहीं बल्कि एक रणनीतिक और कानूनी कदम भी माना जा सकता है।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments