Home » International » चेरनोबिल संयंत्र पर रूसी ड्रोन हमले की रात, तबाही टलने की कहानी

चेरनोबिल संयंत्र पर रूसी ड्रोन हमले की रात, तबाही टलने की कहानी

अंतरराष्ट्रीय/ साइंस टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | कीव | 25 अप्रैल 2026

यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु संयंत्र से जुड़ी एक घटना ने दुनिया को एक बार फिर उस खतरे की याद दिला दी, जो किसी भी चूक से बड़ा संकट बन सकता था। संयंत्र से जुड़े डेनिस खोमेंको (Denys Khomenko) ने उस रात को याद करते हुए बिना किसी भाव के बताया कि कैसे एक रूसी हमलावर ड्रोन ने उस संरक्षित ढांचे को निशाना बनाया, जो दुनिया की सबसे भीषण परमाणु दुर्घटना से प्रभावित हिस्से को ढके हुए है।

यह हमला पिछले वर्ष हुआ था और उस समय हालात बेहद संवेदनशील थे। ड्रोन उस सुरक्षात्मक आर्च (protective arc) से टकराया, जो चेरनोबिल के रिएक्टर को ढककर संभावित रेडिएशन खतरे को सीमित रखने के लिए बनाया गया है। यह वही स्थान है, जहां 1986 की विनाशकारी परमाणु दुर्घटना हुई थी।

खोमेंको के अनुसार, यह घटना बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी, लेकिन सौभाग्य से एक बड़ी त्रासदी टल गई। ड्रोन हमले के बावजूद वह संरचना पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई और किसी बड़े रेडिएशन रिसाव की स्थिति नहीं बनी। हालांकि, इस घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

चेरनोबिल संयंत्र आज भी दुनिया के सबसे संवेदनशील परमाणु स्थलों में से एक माना जाता है। ऐसे में किसी भी सैन्य गतिविधि का उसके आसपास होना वैश्विक चिंता का विषय बन जाता है। इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्ध के बीच परमाणु स्थलों की सुरक्षा कितनी नाजुक हो सकती है। इस घटना को उस बड़े खतरे के तौर पर देखा जा रहा है, जो टल गया, लेकिन जिसने दुनिया को एक बार फिर चेतावनी दी है कि परमाणु सुरक्षा के मामले में जरा सी चूक भी भारी पड़ सकती है।

ALSO READ  ऑपरेशन सफेद सागर के बाद मुशर्रफ का क्या हुआ? सैन्य तख्तापलट, नाकाम भारत यात्रा से लेकर सत्ता, देशद्रोह और निर्वासन तक की पूरी कहानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *