Home » International » वेस्ट बैंक में बस्तियों के बड़े विस्तार की तैयारी, इजरायली सरकार 388 मिलियन डॉलर की नई योजना पर कर रही विचार

वेस्ट बैंक में बस्तियों के बड़े विस्तार की तैयारी, इजरायली सरकार 388 मिलियन डॉलर की नई योजना पर कर रही विचार

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | येरुशलम/रामल्ला | 12 जून 2026

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी तनाव के बीच कब्जे वाले वेस्ट बैंक को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इजरायल की सरकार वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों (सेटलमेंट्स) के विस्तार के लिए लगभग 388 मिलियन डॉलर की नई वित्तीय योजना पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो इसे पिछले कई दशकों में अवैध बस्तियों के सबसे बड़े विस्तारों में से एक माना जाएगा। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और शांति समर्थक समूहों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

इजरायल की बस्ती-विरोधी संस्था “पीस नाउ” (Peace Now) के अनुसार सरकार ने पहले चरण में 152 मिलियन शेकेल (करीब 51 मिलियन डॉलर) की राशि मंजूर की है। इस धनराशि का उपयोग वेस्ट बैंक में 69 नई या विस्तारित बस्तियों और आउटपोस्ट के निर्माण की योजनाएं तैयार करने के लिए किया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आगे इससे कहीं बड़ी राशि स्वीकृत की जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार इजरायली मंत्रिमंडल ने 1 अरब शेकेल (करीब 338 मिलियन डॉलर) के एक अन्य प्रस्ताव पर फिलहाल फैसला टाल दिया है। इस प्रस्ताव को सुरक्षा मंत्रिमंडल के पास भेजा गया है, जिस पर जल्द विचार किया जा सकता है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो वेस्ट बैंक में सड़कें, सार्वजनिक भवन, बुनियादी ढांचा और नई आवासीय परियोजनाओं का निर्माण शुरू हो जाएगा।

पीस नाउ ने आरोप लगाया है कि सरकार सामान्य नियोजन और निर्माण प्रक्रियाओं को दरकिनार कर तेजी से बस्तियों का विस्तार करना चाहती है। संगठन के अनुसार प्रस्तावित निर्माण कार्यों में से कई ऐसे हैं जिनके लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। संस्था का कहना है कि यह कदम न केवल विवाद को और गहरा करेगा बल्कि भविष्य में किसी राजनीतिक समाधान की संभावनाओं को भी कमजोर करेगा।

संगठन ने अपने बयान में कहा कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि केवल सुरक्षा आधारित और कठोर राजनीतिक दृष्टिकोण से समस्या का समाधान संभव नहीं है। उसके अनुसार इजरायल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति केवल राजनीतिक समझौते और कूटनीतिक समाधान के जरिए ही हासिल की जा सकती है।

वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का संवेदनशील विषय रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अधिकांश देशों का मानना है कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में स्थापित ये बस्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध हैं। हालांकि इजरायल इस व्याख्या से सहमत नहीं है और सुरक्षा तथा ऐतिहासिक दावों के आधार पर अपनी नीतियों का बचाव करता रहा है।

वर्तमान इजरायली सरकार दिसंबर 2022 में सत्ता में आई थी। पीस नाउ के आंकड़ों के अनुसार उसके कार्यकाल में अब तक 103 बस्तियों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 51 पूरी तरह नई बस्तियां हैं। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा सरकार के दौरान बस्ती विस्तार की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हुई है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इजरायल पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फ्रांस और नॉर्वे ने उन नेटवर्कों और समूहों पर प्रतिबंध लगाए हैं जिन पर फिलिस्तीनियों के खिलाफ बसने वालों की हिंसा को बढ़ावा देने या वित्तीय सहायता देने के आरोप हैं। इन देशों ने वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा और विस्थापन पर चिंता व्यक्त की है।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के विस्थापन और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं में सरकारी नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संगठन का दावा है कि कई क्षेत्रों में फिलिस्तीनी समुदायों को लगातार दबाव, हिंसा और भूमि संबंधी विवादों का सामना करना पड़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के आंकड़ों के अनुसार वेस्ट बैंक के कम से कम 117 गांव या बस्तियां ऐसी हैं जहां बसने वालों की गतिविधियों और हमलों के कारण आंशिक या पूर्ण विस्थापन की स्थिति पैदा हुई है। इन आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को और बढ़ा दिया है।

यदि प्रस्तावित वित्तीय योजना पूरी तरह लागू होती है तो इससे इजरायल-फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया को बड़ा झटका लग सकता है। दो-राष्ट्र समाधान की अवधारणा पहले ही गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है और बस्तियों का विस्तार इस लक्ष्य को और कठिन बना सकता है।

दुनिया की निगाहें इजरायल के सुरक्षा मंत्रिमंडल के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि अरबों शेकेल की यह योजना स्वीकृत हो जाती है तो वेस्ट बैंक का राजनीतिक और जनसांख्यिकीय परिदृश्य आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है। साथ ही यह मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद को केंद्र में ला सकता है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted