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पासपोर्ट जेब में, सीरिया कंधे पर! इंडिया टीवी की खबर ने तो भौतिकी के नियम ही बदल दिए

व्यंग्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 जून 2026

भारतीय टीवी पत्रकारिता ने एक बार फिर वह कर दिखाया है जिसे देखकर विज्ञान, भूगोल, इमिग्रेशन विभाग और सामान्य बुद्धि सभी सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। एक चैनल की खबर के अनुसार एक व्यक्ति एक युवती को “जबरन सीरिया ले जा रहा था”। खबर सुनते ही देशभर के लोग हैरान रह गए कि आखिर यह कारनामा हुआ कैसे?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सच है तो संबंधित व्यक्ति को तत्काल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, एयर इंडिया और विदेश मंत्रालय के संयुक्त शोध प्रोजेक्ट में शामिल कर लेना चाहिए। क्योंकि सामान्य जानकारी के अनुसार विदेश जाने के लिए पासपोर्ट, वीज़ा, टिकट, इमिग्रेशन और सुरक्षा जांच जैसी छोटी-मोटी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। लेकिन टीवी की दुनिया में लगता है कि कोई व्यक्ति दूसरे को जेब में डालकर सीधे सीरिया पहुंचा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक खबर देखने के बाद कई दर्शक यह समझने की कोशिश करते रहे कि आखिर “जबरन सीरिया ले जाने” की प्रक्रिया होती कैसी है। क्या युवती को किसी सूटकेस में बंद कर दिया गया था? क्या वह एयरपोर्ट पर अदृश्य हो गई थी? क्या इमिग्रेशन अधिकारियों ने आंखें बंद कर ली थीं? या फिर यह कोई नई तकनीक है जिसकी जानकारी अभी तक दुनिया को नहीं है?

इस बीच सोशल मीडिया पर लोगों ने सवालों की झड़ी लगा दी। एक यूजर ने लिखा, “अगर कोई मुझे जबरन कनॉट प्लेस तक नहीं ले जा सकता तो सीरिया कैसे ले गया?” दूसरे ने पूछा, “क्या सीरिया अब दिल्ली मेट्रो की नई लाइन पर आ गया है?”

खबर में सबसे दिलचस्प हिस्सा “जबरदस्ती” शब्द रहा। आलोचकों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति घर से निकलता है, यात्रा करता है, एयरपोर्ट पहुंचता है, सुरक्षा जांच से गुजरता है और फिर भी किसी स्तर पर किसी को नहीं बताता कि उसे जबरन ले जाया जा रहा है, तो कम से कम कुछ सवाल पूछे जाने चाहिए। लेकिन सवाल पूछना आजकल टीआरपी के खिलाफ माना जाता है।

पत्रकारिता के पुराने उसूल कहते थे कि खबर में तथ्य खोजो। नए दौर का फॉर्मूला शायद यह है कि पहले निष्कर्ष तय करो, फिर उसके आसपास कहानी बना लो। दर्शकों का काम केवल चौंकना है, सोचना नहीं।

मीडिया विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भविष्य में ऐसी खबरों के साथ एक चेतावनी भी चलनी चाहिए—”इस रिपोर्ट में प्रयुक्त तर्क और वास्तविकता के बीच किसी भी समानता को संयोग माना जाए।”

फिलहाल देश की जनता यही सोच रही है कि आखिर सीरिया पहुंचने का यह नया रास्ता कौन सा है, जिसके बारे में विदेश मंत्रालय, एयरलाइंस, इमिग्रेशन विभाग और संयुक्त राष्ट्र तक को जानकारी नहीं है, लेकिन टीवी स्टूडियो को पूरी खबर है।

इंडिया टीवी की यह खबर कम और कल्पना ज्यादा दिखाई दी। और अगर इसी रफ्तार से पत्रकारिता आगे बढ़ी तो आने वाले दिनों में शायद हमें यह भी सुनने को मिल जाए कि किसी को जबरन चांद पर ले जाया जा रहा था, लेकिन शुक्र है कि पुलिस ने समय रहते रोक लिया।

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