नई दिल्ली | राजनीतिक डेस्क
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के वरिष्ठ नेता राम माधव की एक सार्वजनिक सभा में दी गई बाइट के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की विदेश नीति और कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठाए, जिसे लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
अपने संबोधन में राम माधव ने कहा कि भारत ने ईरान से तेल लेना बंद किया, रूस से भी तेल आयात में बदलाव किए, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को बिना विरोध स्वीकार किया और इन सब फैसलों के बावजूद विपक्ष की आलोचना भी झेली। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन नीतिगत फैसलों में सरकार ने क्या कमी रखी।
बयान में यह भी कहा गया कि भारत की विदेश नीति पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव दिखता है। इस दौरान यह टिप्पणी भी सामने आई कि प्रधानमंत्री मोदी वही करते हैं जो ट्रंप चाहते हैं और ट्रंप द्वारा भारत को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी भारत की ओर से कड़ा जवाब नहीं दिया गया।
कांग्रेस ने इस बयान को मुद्दा बनाते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा है और इसे “नरेंद्र के सरेंडर की कहानी” बताया है। विपक्ष का कहना है कि जब सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेता खुद इस तरह के सवाल उठा रहे हैं, तो यह सरकार की नीतियों पर गंभीर चिंता को दिखाता है।
हालांकि, बीजेपी की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के अंदर भी इस बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
राम माधव जैसे वरिष्ठ नेता की सार्वजनिक मंच से आई टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ऐसे में यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।




