राजनीति / पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 15 अप्रैल 2026
कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल चुनावी रैली में गरजते हुए कहा – “बंगाल में जितने रेप हुए हैं, उनकी फाइलें निकाली जाएंगी।” एकदम सटीक टाइमिंग। चुनाव ठीक सर पर। लेकिन सवाल ये है – जब बीजेपी शासित राज्यों में लाखों रेप केस पेंडिंग पड़े हैं, तब ये फाइलें कहां गायब हो जाती हैं?
ये कोई आम सवाल नहीं। ये सीधा सवाल है उस ‘सिलेक्टिव’ प्रधानमंत्री से, जिनकी 75 साल की उम्र में भी सत्ता की भूख कम नहीं हुई। देश देख रहा है – रेप जैसे संवेदनशील मुद्दे को भी वोट बैंक की राजनीति का हथियार बना दिया जा रहा है।
1. बिल्किस बानो के गैंगरेप के 11 दोषियों को गुजरात (बीजेपी सरकार) ने 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया। पूरा देश शर्मिंदा हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में रिहाई रद्द की, लेकिन सवाल अभी भी कायम – रिहाई के वक्त मोदीजी को ये ‘पेंडिंग केस’ क्यों याद नहीं आए?
2. बीएचयू की उस छात्रा का रेप, जिसके आरोपियों में बीजेपी आईटी सेल के दो लड़के शामिल थे। केस चला, लेकिन फाइल दोबारा क्यों नहीं खुली? क्यों चुप्पी साध ली गई?
3. बलात्कारी राम रहीम और आसाराम – दोनों के केसों की फाइलें अचानक ‘बंद’ कैसे हो गईं? दोनों अभी भी जेल में हैं, लेकिन उनके कनेक्शन और पैरोल की खबरें बार-बार आती रहीं। मोदी सरकार में ये फाइलें क्यों दब गईं?
4. उत्तर प्रदेश – 10 साल से बीजेपी सरकार। 67,000 रेप केस पेंडिंग। फाइलें खुलवाने का वादा कहां गया?
5. महाराष्ट्र – 33,000 पेंडिंग रेप केस। यहां भी बीजेपी का हाथ। फाइलें कब खुलेंगी?
6. बिहार – 16,000 रेप केस पेंडिंग। एनडीए सरकार। चुप्पी क्यों?
7. मध्य प्रदेश – 15 साल से बीजेपी राज। 10,000 के करीब पेंडिंग केस। 15 साल में फाइलें खोलने का वक्त नहीं मिला?
8. ओड़िशा – 12,000 पेंडिंग। फाइल खुलवाने का इंतजार कब तक?
9. राजस्थान – 5,400 के करीब पेंडिंग। बीजेपी सरकार में भी यही हाल?
10. राजधानी दिल्ली – 9,000 से ज्यादा पेंडिंग रेप केस। केंद्र की नजर के नीचे। यहां फाइलें क्यों नहीं खुलतीं?
ये आंकड़े कोई विपक्षी प्रचार नहीं – NCRB और कोर्ट पेंडेंसी के आंकड़ों से निकले हैं। पूरे देश में रेप केसों की पेंडेंसी भारी है, लेकिन जब बंगाल में चुनाव आता है तो मोदीजी को अचानक ‘फाइल निकालो’ याद आ जाता है।
देश ने ऐसे ‘सिलेक्टिव’ प्रधानमंत्री पहले नहीं देखा। 75 साल की उम्र में भी रेप जैसे मुद्दे को वोट का हथियार बनाना? इंसानियत शर्मिंदा है।
मोदीजी, सत्ता हमेशा नहीं रहेगी। इतिहास सिर्फ़ भाषण नहीं, काम देखता है। बंगाल में ड्रामा बंद कीजिए। पूरे देश की फाइलें खोलिए – या फिर चुप रहिए, क्योंकि सिर्फ वोट की राजनीति के तहत झूठ पर झूठ बोलना शर्मनाक है। जनता अब सब देख रही है।



