राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अप्रैल 2026
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज ‘द हिंदू’ में छपे अपने तीखे लेख के जरिए मोदी सरकार की सारी पोल खोलकर रख दी है। जो लोग सोच रहे थे कि बीजेपी महिला आरक्षण लेकर महिलाओं का भला कर रही है, उनकी आंखें खुल गई होंगी। सोनिया गांधी ने साफ लिखा है कि महिला आरक्षण तो पुराना और तयशुदा मुद्दा है, असली खतरा डिलिमिटेशन का है जो संविधान पर सीधा हमला है। मोदी सरकार इस पूरे खेल को महिला आरक्षण के नाम पर छिपाकर चला रही है, ताकि जातिगत जनगणना कभी न हो सके और पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक वर्गों को उनका हक न मिल सके।
सितंबर 2023 में जब मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाया था, तब भी कांग्रेस ने चेतावनी दी थी कि सरकार की मंशा साफ नहीं है। कानून में जानबूझकर जनगणना और डिलिमिटेशन की शर्त डाली गई थी, ताकि आरक्षण लागू होने में दशकों की देरी हो जाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने तभी कहा था कि बिना किसी शर्त के 2024 में ही महिला आरक्षण लागू करो, ताकि महिलाएं सदन पहुंच सकें। लेकिन अब 30 महीने बाद मोदी जी को अचानक क्या सूझा कि अपनी ही बनाई कानून को बदलने की तैयारी में जुट गए हैं? सोनिया गांधी ने लिखा है कि प्रधानमंत्री का असली इरादा अब जातिगत जनगणना को और देरी करना और उसे पटरी से उतारना है। ये बीजेपी की पुरानी चाल है – सामने कुछ बोलो, पीछे कुछ और करो।
राहुल गांधी ने एक साल पहले ही जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया था और कहा था कि ये होकर रहेगी। लेकिन उसी मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए। खुद नरेंद्र मोदी ने इसे ‘अर्बन नक्सल की सोच’ बताकर अपमानित किया था। आज वही सरकार जातिगत जनगणना की बात तो मान रही है, लेकिन डिलिमिटेशन के नाम पर उसकी हत्या करने की तैयारी कर रही है। 2011 के बाद देश में कोई जनगणना नहीं हुई। 2021 की जनगणना भी पांच साल से लटकी पड़ी है। अब डिजिटल जनगणना के बहाने आंकड़े 2027 तक टाल दिए गए हैं। फिर बिना सही आंकड़ों के डिलिमिटेशन कैसे होगा? SC/ST सीटें किस आधार पर तय होंगी? बिहार और तेलंगाना के जातिगत सर्वे तो साफ बता चुके हैं कि पिछड़े वर्गों की आबादी कितनी बड़ी है, लेकिन मोदी सरकार इन आंकड़ों को स्वीकार करने को तैयार ही नहीं।
सोनिया गांधी ने खुलकर लिखा है कि मोदी सरकार लगातार जातिगत जनगणना से भाग रही है। SIR (Special Intensive Revision) के नाम पर लाखों-करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में जनसंख्या के आंकड़े मनमाने ढंग से बदले जा रहे हैं। फिर किस मुंह से ये सरकार डिलिमिटेशन की बात कर रही है? ये साफ है कि बीजेपी महिला आरक्षण के नाम पर एक बड़ी साजिश रच रही है। OBC महिलाओं को आरक्षण देने का रास्ता बंद करने के लिए डिलिमिटेशन का हथियार इस्तेमाल किया जा रहा है। सोनिया गांधी ने इसे ‘संविधान पर हमला’ बताया है और कहा है कि अनौपचारिक जानकारी के आधार पर हो रहा यह डिलिमिटेशन बेहद खतरनाक है।
कांग्रेस पार्टी अब भी अपना स्टैंड साफ रखे हुए है – महिला आरक्षण बिना किसी शर्त और बिना डिलिमिटेशन के फौरन लागू होना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार की मंशा अब साफ हो चुकी है। वो जातिगत जनगणना को हमेशा के लिए दफनाना चाहती है, ताकि देश के असली पिछड़े और वंचित वर्गों को उनका हक न मिले। सोनिया गांधी का यह लेख बीजेपी के झूठ और छलावे का आईना है। अब जनता को फैसला करना है कि क्या वो इस साजिश को स्वीकार करेगी या फिर कांग्रेस के साथ खड़ी होकर सच्चाई की लड़ाई लड़ेगी।



