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ट्रंप ने शेयर किया शहबाज का मैसेज—मध्य पूर्व में ‘मध्यस्थ’ बना पाकिस्तान, भारत की कूटनीति पर सवाल

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 मार्च 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा किया है, जिसमें पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता का मेजबान बताता दिख रहा है।

शहबाज शरीफ ने अपने संदेश में साफ लिखा कि पाकिस्तान “मध्य पूर्व में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए संवाद की कोशिशों का स्वागत करता है” और अगर अमेरिका और ईरान सहमत हों, तो पाकिस्तान इस वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है। उन्होंने इसे “सम्मान की बात” बताया और कहा कि पाकिस्तान एक व्यापक और निर्णायक समझौते के लिए मंच देने को तैयार है।

ट्रंप द्वारा इस संदेश को साझा करना केवल एक साधारण सोशल मीडिया गतिविधि नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई अमेरिका अब पाकिस्तान को इस पूरे समीकरण में एक ‘मध्यस्थ’ के रूप में देख रहा है?

इस घटनाक्रम ने भारत में भी बहस छेड़ दी है। लंबे समय से खुद को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और निर्णायक शक्ति के रूप में पेश करने वाला भारत इस पूरे मामले में कहीं दिखाई नहीं दे रहा। आलोचकों का कहना है कि जिन मुद्दों पर भारत की भूमिका मजबूत होनी चाहिए थी, वहां अब पाकिस्तान जैसी आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही सरकार सक्रिय नजर आ रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अवसर वही देश पकड़ता है जो समय पर पहल करता है। पाकिस्तान का यह प्रस्ताव उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है—जहां वह खुद को एक जिम्मेदार और शांति समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, यह भी सच है कि केवल प्रस्ताव देने से कोई देश मध्यस्थ नहीं बन जाता। असली परीक्षा तब होगी जब अमेरिका और ईरान जैसे बड़े खिलाड़ी इस भूमिका को स्वीकार करें। फिलहाल, ट्रंप की पोस्ट ने इतना जरूर कर दिया है कि पाकिस्तान को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है—और भारत के लिए यह एक असहज सवाल छोड़ गया है कि आखिर इस पूरी तस्वीर में उसकी जगह कहां है।

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