Home » National » WATCH VIDEO — मौलाना कल्बे जव्वाद : ईरान में गाय नहीं खाई जाती, इज़रायल में हर जगह बीफ मिलता है—फिर भी उसे फादरलैंड कहते हो’

WATCH VIDEO — मौलाना कल्बे जव्वाद : ईरान में गाय नहीं खाई जाती, इज़रायल में हर जगह बीफ मिलता है—फिर भी उसे फादरलैंड कहते हो’

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | लखनऊ | 13 मार्च 2026

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद का एक बयान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और इज़रायल-ईरान को लेकर भारत में हो रही बहस के बीच उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ जगहों पर इज़रायल की जीत के लिए हवन और पूजा जैसे कार्यक्रम किए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को वास्तविक तथ्यों पर भी ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक भावनाओं की बात करने वाले लोगों को यह भी समझना चाहिए कि दुनिया के अलग-अलग देशों में खान-पान और सामाजिक व्यवहार किस तरह अलग है।

मौलाना कल्बे जव्वाद ने अपने बयान में कहा कि पूरे ईरान में गाय का मांस नहीं खाया जाता और वहां इस तरह की परंपरा नहीं है। इसके विपरीत उन्होंने इज़रायल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ऐसे रेस्तरां मिलना मुश्किल है जहां बीफ न परोसा जाता हो। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के लिए गाय ‘माता’ का दर्जा रखती है, उन्हें यह सोचने की जरूरत है कि वे किस आधार पर ऐसे देश के समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं जहां गाय का मांस आम तौर पर खाया जाता है।

उन्होंने अपने बयान में तंज भरे लहजे में कहा, “जहां तुम्हारी ‘माता’ को खाया जाता है, उसी देश को तुम फादरलैंड कह रहे हो।” मौलाना का कहना था कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर राय बनाते समय भावनाओं के साथ-साथ तथ्यों को भी समझना जरूरी है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और विभिन्न राजनीतिक तथा सामाजिक समूहों के बीच इस पर बहस शुरू हो गई है।

कुछ लोग मौलाना के बयान को पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों और भारत में चल रही वैचारिक राजनीति के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे एक विवादित टिप्पणी भी बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इज़रायल-ईरान संघर्ष और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने भारत में भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है, और मौलाना का बयान उसी बहस का एक हिस्सा बन गया है।

फिलहाल यह बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर तेजी से चर्चा में है। समर्थक इसे एक तर्कपूर्ण सवाल के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान से अनावश्यक विवाद पैदा हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments