एबीसी डेस्क 16 दिसंबर 2025
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट्स और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि यहूदी और इज़राइली नागरिकों, संस्थानों तथा धार्मिक स्थलों को भारत में निशाना बनाया जा सकता है। इसी के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने देशभर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और सभी राज्यों को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, बॉन्डी बीच हमले में यहूदी समुदाय को निशाना बनाए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर यह चेतावनी उभरी है कि चरमपंथी संगठन या उनसे प्रेरित ‘लोन वुल्फ’ हमलावर अन्य देशों में भी इसी तरह के प्रतीकात्मक और सॉफ्ट टारगेट्स पर हमला कर सकते हैं। भारत में मौजूद इज़राइली दूतावास, काउंसलेट, यहूदी आराधनास्थल (सिनेगॉग), स्कूल, सांस्कृतिक केंद्र और पर्यटन स्थलों को विशेष निगरानी में रखा गया है।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर IB, RAW, NIA और राज्य पुलिस बलों के बीच समन्वय बढ़ा दिया गया है। दिल्ली, मुंबई, गोवा, पुणे, बेंगलुरु, जयपुर और केरल जैसे शहर—जहां बड़ी संख्या में इज़राइली नागरिक और पर्यटक आते हैं—वहां सुरक्षा गश्त बढ़ा दी गई है। खास तौर पर उन स्थानों पर निगरानी कड़ी की गई है, जहां इज़राइली पर्यटक ठहरते हैं या यहूदी समुदाय से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन और वैश्विक घटनाओं से प्रेरित कुछ कट्टरपंथी तत्व भारत जैसे खुले और लोकतांत्रिक देश में सनसनी फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। हाल के वर्षों में देखा गया है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी घटनाओं के बाद सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स पर नफरत फैलाने वाले संदेश तेजी से फैलते हैं, जो संभावित हमलावरों को उकसा सकते हैं। इसी कारण साइबर निगरानी भी तेज कर दी गई है।
भारत में यह अलर्ट सिर्फ सुरक्षा कारणों से ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है। भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक, रक्षा और खुफिया सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में किसी भी तरह की आतंकी घटना न केवल आंतरिक सुरक्षा पर असर डाल सकती है, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पहले भी 26/11 मुंबई हमले जैसी घटनाओं का सामना कर चुका है, जहां यहूदी ठिकानों को खास तौर पर निशाना बनाया गया था। उसी अनुभव के आधार पर इस बार एजेंसियां कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। सॉफ्ट टारगेट्स—जैसे धार्मिक स्थल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पर्यटक स्थल—को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
इस बीच, भारत में यहूदी समुदाय और इज़राइली दूतावास के संपर्क में सुरक्षा एजेंसियां लगातार बनी हुई हैं। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, व्यक्ति या ऑनलाइन कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध सूचना को तुरंत पुलिस को बताएं।
कुल मिलाकर, सिडनी बॉन्डी बीच हमला अब सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की आंतरिक सुरक्षा का मामला नहीं रह गया है, बल्कि उसने वैश्विक सुरक्षा तंत्र को अलर्ट मोड में ला दिया है। भारत में जारी हाई अलर्ट इस बात का संकेत है कि बदलते वैश्विक हालात में आतंकी खतरे सीमाओं से परे फैल चुके हैं—और उनसे निपटने के लिए पहले से ज्यादा सतर्क, समन्वित और तेज़ प्रतिक्रिया की जरूरत है।



