सुनील कुमार । नई दिल्ली 11 दिसंबर 2025
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी व्यापक ट्रेड डील (India-US Trade Deal) एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंथा नागेश्वरन ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश विवादित मुद्दे लगभग सुलझ चुके हैं और यदि वार्ता इसी गति से आगे बढ़ती है, तो मार्च 2026 तक एक बड़ा व्यापारिक समझौता औपचारिक रूप से सामने आ सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की तैयारी भी तेज हो चुकी है।
नागेश्वरन के अनुसार, भारत और अमेरिका पिछले चार वर्षों से अलग-अलग सेक्टरों—जैसे कृषि, टेक्नोलॉजी, फार्मा, ट्रेड टैरिफ, डिजिटल व्यापार और मार्केट एक्सेस—पर गहन स्तर पर बातचीत करते रहे हैं। दोनों पक्ष अब ऐसे समाधान बिंदुओं तक पहुँच रहे हैं जहाँ अधिकांश मतभेद खत्म हो चुके हैं और बची हुई जटिलताओं पर भी प्रगति तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि यह डील दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को बेहतर करने के साथ-साथ निवेश प्रवाह, तकनीकी सहयोग और रोजगार अवसरों को भी बढ़ाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक वैल्यू चेन में अधिक गहराई से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
CEA नागेश्वरन के बयान की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि अमेरिका और भारत वर्तमान में एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। बीते वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है और अब डिजिटल इकॉनमी, ग्रीन टेक्नोलॉजी, AI, सेमीकंडक्टर और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व सहयोग की संभावनाएँ बन रही हैं। यदि यह ट्रेड डील अंतिम रूप से तय होती है, तो न केवल टैरिफ कम होंगे, बल्कि भारतीय और अमेरिकी कंपनियों के लिए दोनों देशों के बाजारों तक पहुँच आसान हो जाएगी। इससे मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालाँकि, नागेश्वरन ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने बड़े और व्यापक समझौते को अंतिम रूप देना एक जटिल प्रक्रिया है। कुछ मुद्दे अभी भी विशेषज्ञ स्तर पर समीक्षा में हैं और तकनीकी दायरे में अतिरिक्त चर्चाएँ जारी हैं। फिर भी उन्होंने उम्मीद जताई कि वार्ताओं की सकारात्मक गति बताती है कि मार्च 2026 एक यथार्थवादी समयसीमा है। इस बयान ने बाजार विश्लेषकों और नीति विशेषज्ञों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है, क्योंकि इसे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
अगर यह डील तय होती है, तो यह न सिर्फ व्यापारिक साझेदारी बल्कि भू-रणनीतिक सहयोग को भी नई मजबूती देगी। बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों और सप्लाई चेन चुनौतियों के दौर में भारत और अमेरिका दोनों के लिए यह समझौता भविष्य की सुरक्षा, स्थिरता और विकास का एक बड़ा स्तंभ साबित हो सकता है।




