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लाइव बैठक से डर क्यों?”—टीएमसी का चुनाव आयोग पर सीधा हमला

साजिद अली। कोलकाता 26 नवंबर 2025

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता और उसकी कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाए हैं। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा 28 नवंबर को पार्टी के 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये 10 सांसद भारत की जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं, जबकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। ऐसे में आयोग का खुद को “ट्रांसपेरेंट” और “कॉर्डियल” बताना सिर्फ एक दिखावा है, वास्तविकता नहीं। बनर्जी का आरोप है कि आयोग की ओर से जारी की जाने वाली सूचनाएँ सिलेक्टिव लीक्स हैं, जिन्हें एक ‘मैनेज्ड इमेज’ बनाने के लिए तैयार किया जाता है।

अभिषेक बनर्जी ने आयोग को सीधे चुनौती देते हुए पूछा कि अगर चुनाव आयोग सचमुच पारदर्शी है तो वह सिर्फ 10 सांसदों से खुली बैठक करने से क्यों डर रहा है? उन्होंने मांग की कि यह बैठक पूरी तरह लाइव टेलीकास्ट की जाए, ताकि देश देख सके कि टीएमसी द्वारा उठाए गए पाँच स्पष्ट, सीधी और वैध सवालों का आयोग क्या जवाब देता है। बनर्जी ने यह भी कहा कि यदि आयोग के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे बंद कमरों, पत्राचार और सीमित बयानबाजी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। सवाल सीधा है—क्या चुनाव आयोग लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह है या वह गोपनीयता की आड़ में अपनी छवि नियंत्रित करने का खेल खेल रहा है?

इसी बीच चुनाव आयोग की ओर से 24 नवंबर 2025 को टीएमसी को एक औपचारिक पत्र भेजा गया है, जिसमें बताया गया है कि आयोग 28 नवंबर को सुबह 11 बजे टीएमसी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए तैयार है। पत्र में कहा गया है कि आयोग राजनीतिक दलों के साथ रचनात्मक संवाद को हमेशा स्वागतयोग्य मानता है और इसी भावना में यह बैठक तय की गई है। आयोग ने टीएमसी से प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम और उनके वाहन विवरण पहले से भेजने का अनुरोध किया है, ताकि सुरक्षा और व्यवस्था का उचित प्रबंधन किया जा सके। यह पत्र राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के 23 नवंबर को भेजे गए अनुरोध के जवाब में जारी किया गया है।

टीएमसी का आरोप है कि आयोग की यह “खुलापन” केवल कागजी है, क्योंकि वास्तविक पारदर्शिता तभी सिद्ध होगी जब बैठक जनता के सामने खुले तौर पर होगी। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग वह संस्था है जिस पर देश की चुनावी निष्पक्षता निर्भर करती है, और यदि वही संस्था अपने दरवाज़े जनता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए खुलकर नहीं रख सकती, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। टीएमसी ने संकेत दिया है कि वह बैठक में चुनाव आयोग से कठोर सवाल पूछेगी—चाहे बैठक लाइव हो या बंद कमरे में।

अब देश की नज़र इस बात पर टिकी है कि 28 नवंबर की इस महत्वपूर्ण बैठक में क्या होगा—क्या चुनाव आयोग खुद को पारदर्शी साबित करेगा, या टीएमसी के आरोप और सवाल और भी गहरे होते जाएंगे?

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