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दिल्ली-NCR की हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: काम बंद होने पर मजदूरों को भत्ता, हर महीने होगी सुनवाई

कुमार रंजन | नई दिल्ली 19 नवंबर 2025

दिल्ली-एनसीआर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और सरकारों के बीच जिम्मेदारी के सवालों ने जनता को केवल बढ़ती हुई चिंता और प्रदूषण का बोझ दिया है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर अभूतपूर्व सख्ती दिखाते हुए साफ कहा कि अब ‘कार्रवाई नहीं, परिणाम’ चाहिए। न्यायालय ने निर्माण कार्यों पर लगे प्रतिबंध से प्रभावित मजदूरों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को आदेश दिया है कि उन सभी कंस्ट्रक्शन वर्करों को तुरंत भत्ता दिया जाए, ताकि उनके परिवार भूख और आर्थिक संकट में न धकेले जाएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर मजदूरों की रोज़ी-रोटी काटना किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह फैसला केवल आर्थिक सहायता का प्रावधान नहीं है, बल्कि केंद्र और राज्यों को चेतावनी भी है कि वे अपने कर्तव्यों से बच नहीं सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या कोई मौसमी संकट नहीं, बल्कि एक ‘स्थायी आपदा’ का रूप ले चुकी है। अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की कार्यवाही पर गहरी असंतुष्टि जताते हुए सवाल किया कि आखिर वर्षों से योजनाएँ, मीटिंगें और घोषणाएँ करने के बावजूद हवा साफ क्यों नहीं हो रही। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकारें ठोस कदम नहीं उठातीं, तो न्यायपालिका को और कठोर निर्देश देने पड़ेंगे। न्यायालय के अनुसार, पराली जलाना हो, वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक धुआं या सतत निर्माण—हर क्षेत्र में अमल और जवाबदेही की कमी ही इस संकट को और डरावना बना रही है। कोर्ट ने इस मामले में हर महीने नियमित सुनवाई करने का फैसला किया है, ताकि सभी एजेंसियों की प्रगति की समीक्षा हो सके और किसी को भी जिम्मेदारी से बचने का मौका न मिले।

इस सख्त रुख के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उस दिशा में एक बड़ा कदम है जहां प्रदूषण सिर्फ मौसम की खबर नहीं, बल्कि जन-जीवन और नीति-निर्माण का केंद्र बने। मजदूरों को भत्ता देने का निर्देश यह भी याद दिलाता है कि प्रदूषण रोकने के नाम पर की जाने वाली कार्रवाइयाँ मानव-केन्द्रित होनी चाहिए, न कि दंडात्मक। वहीं राजनीतिक गलियारों में यह फैसला एक नई बहस छेड़ रहा है कि क्या सरकारें आखिरकार संयुक्त प्रयासों से इस समस्या से निपटने के लिए मजबूर होंगी। फिलहाल, अदालत की सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा साफ करने का संघर्ष अब नई गति पकड़ेगा, और न्यायपालिका इसकी हर छोटी-बड़ी प्रगति पर नज़र बनाए रखेगी।

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