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फरवरी में उत्तराखंड ग्लेशियर आपदा

उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिर गया, जिससे अचानक बाढ़ आ गई। इस आपदा में दो जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गईं और सौ से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए। तपोवन-विष्णुगढ़ परियोजना में काम कर रहे मजदूर सुरंगों में फंस गए थे। सेना, NDRF और ITBP ने राहत व बचाव कार्यों में दिन-रात काम किया। यह घटना ग्लोबल वॉर्मिंग और अंधाधुंध निर्माण के दुष्परिणाम के रूप में देखी गई। वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास की नीति अपनाने की वकालत की। इस घटना ने भविष्य की परियोजनाओं की योजना पर पुनर्विचार को मजबूर किया।

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