जामिया रजिस्ट्रार नियुक्ति पर बड़ा बवाल: पुलिस शिकायत में फर्जी दस्तावेज, योग्यता छिपाने और रिकॉर्ड में हेरफेर के गंभीर आरोप

डॉ. महताब आलम रिजवी की नियुक्ति, प्रोफेसर पद पर पदोन्नति और रजिस्ट्रार बनने की प्रक्रिया पर उठे सवाल; शिकायतकर्ता ने FIR दर्ज कर स्वतंत्र जांच की मांग की, SFI-JMI ने भी तत्काल जांच की मांग उठाई
राहुल गांधी की ललकार ने मोदी-शाह सरकार की नींद उड़ा दी — झूठ, घोटाले और दमन के खिलाफ युवाओं की आवाज

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 अगस्त 2026 राहुल गांधी आज भारतीय राजनीति में उस विपक्षी नेता की भूमिका निभा रहे हैं जो सत्ता के सामने झुकने से इनकार करता है। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने और विपक्ष ने नरेंद्र मोदी-अमित शाह सरकार के कई बड़े दावों और विफलताओं को बेनकाब […]
कृष्णनगर में महुआ मोइत्रा की सुरक्षा पर सवाल, आधी रात सर्किट हाउस खाली कराने का आरोप

पवन खेड़ा ने उठाया गंभीर सवाल, बाहर भीड़ के ‘जय श्रीराम’ के नारे का दावा; सांसद बोलीं—पीछे हटने वाली नहीं
GEN Z के बाद GEN ALPHA ने संभाली कमान… उज्जैन में बेटियों का सवाल—स्कूल 12 किमी दूर क्यों?

सराफा कन्या स्कूल शिफ्टिंग के विरोध में सैकड़ों छात्राओं का जोरदार प्रदर्शन, घंटों धरना; लिखित आश्वासन के बाद प्रशासन को फिलहाल रोकना पड़ा कदम
हिंदी सिनेमा की पहली नायिका से आज की अभिनेत्री तक: घूंघट से ग्लोबल मंच तक का सफर

भारतीय सिनेमा की कहानी केवल फिल्मों, सितारों और बॉक्स ऑफिस की कहानी नहीं है। यह उस समाज की बदलती तस्वीर भी है, जिसमें एक समय महिलाओं का फिल्मों में काम करना ही साहस माना जाता था और आज वही अभिनेत्री करोड़ों की फिल्मों की नायिका, निर्माता, निर्देशक, वैश्विक ब्रांड एंबेसडर और अंतरराष्ट्रीय मंच की पहचान बन चुकी है। फातिमा बेगम से लेकर देविका रानी, नरगिस, मधुबाला, मीना कुमारी, वहीदा रहमान, हेमा मालिनी, रेखा, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, काजोल, तब्बू, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट तक का सफर दरअसल एक सदी में बदलती भारतीय महिला की कहानी है। कभी कैमरे के सामने आना सामाजिक वर्जनाओं को चुनौती देना था, आज कैमरे के पीछे की कमान संभालना भी अभिनेत्री के लिए उतना ही स्वाभाविक है।
आजादी से अब तक: जब भारत की कहानी रुपहले पर्दे पर चलती रही

मूक फिल्मों से OTT तक—सिनेमा ने बदला भारत का चेहरा, समाज की सोच और मनोरंजन का अंदाज
स्वतंत्र भारत का खुशहाल सफर: संघर्ष से समृद्धि और विकसित भारत की ओर

नेहरू के औद्योगिक भारत से मोदी के आत्मनिर्भर और डिजिटल भारत तक, आठ दशकों में बदलती विकास यात्रा
आजादी की कुर्बानी से विकसित भारत के संकल्प तक, शफीक मेमोरियल स्कूल में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संदेश

शफीक मेमोरियल स्कूल में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने स्वतंत्रता दिवस पर विद्यार्थियों से कहा कि आजादी हमें अनगिनत बलिदानों के बाद मिली है, इसलिए इसे केवल उत्सव नहीं, जिम्मेदारी के रूप में समझना होगा। उन्होंने बच्चों से नशे, हिंसा और बुरी आदतों से दूर रहकर शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और मेहनत को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। उनका संदेश था कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का काम नहीं—हर विद्यार्थी का चरित्र, हर युवा की मेहनत और हर नागरिक की जिम्मेदारी ही विकसित भारत की असली नींव है।
AI से जुड़ी हिंसक कल्पनाओं के बीच भारतीय परिवार की दोहरी हत्या, अमेरिका में 17 वर्षीय किशोर पर मां-भाई की हत्या का आरोप

अमेरिका में भारतीय मूल के 17 वर्षीय किशोर पर अपनी मां और 14 वर्षीय भाई की हत्या का आरोप लगा है। जांच में उसके कथित तौर पर AI और इंटरनेट पर हिंसा से जुड़ी काल्पनिक सामग्री तैयार करने की बात सामने आई है, हालांकि AI और हत्या के बीच सीधा कारणात्मक संबंध अभी साबित नहीं हुआ है। यह घटना परिवार, स्कूल और तकनीकी प्लेटफॉर्मों के सामने बड़ा सवाल रखती है—जब युवा मानसिक तनाव या हिंसक विचारों से जूझें, तो AI उन्हें सिर्फ जवाब नहीं, सही समय पर मदद और सुरक्षा की दिशा कैसे दे?
89% रेलवे स्टेशन बुनियादी सुविधाओं में फेल, CAG की ऑडिट रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल

CAG की ऑडिट रिपोर्ट ने रेलवे की बुनियादी सुविधाओं पर बड़ा सवाल खड़ा किया है—512 में 458 यानी 89% स्टेशनों पर जरूरी यात्री सुविधाओं की कमी मिली। पंखे, पीने का पानी, बैठने की जगह, शौचालय और प्लेटफॉर्म शेल्टर जैसी मूल जरूरतें कई स्टेशनों पर अब भी अधूरी हैं। आधुनिक ट्रेनें और भव्य स्टेशन जरूरी हैं, लेकिन रेलवे की असली कसौटी वह आम यात्री है जो प्लेटफॉर्म पर सुविधा और सम्मान के साथ अपनी ट्रेन का इंतजार करता है।