नई दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | 15 अगस्त 2026
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुरानी दिल्ली के प्रतिष्ठित शफीक मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण के संदेश से ओतप्रोत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रमुख इंद्रेश कुमार ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष, बलिदान और देश के प्रति जिम्मेदारियों से परिचित कराया। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और गणमान्य लोग मौजूद रहे। तिरंगा फहराए जाने के बाद पूरा परिसर देशभक्ति के नारों और भारत माता के जयघोष से गूंज उठा।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत की आजादी केवल राजनीतिक परिवर्तन का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे असंख्य लोगों का संघर्ष, त्याग और बलिदान था। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद करते हुए बच्चों से कहा कि आज उन्हें जो स्वतंत्रता और अवसर मिले हैं, उनके पीछे पिछली पीढ़ियों का बहुत बड़ा संघर्ष है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की कहानी दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी बलिदानी गाथाओं में से एक है। उन्होंने विभाजन की त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और महिलाओं ने भी असहनीय पीड़ा झेली। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को केवल इतिहास की किताबों तक सीमित न रखने, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की अपील की।
इंद्रेश कुमार ने बच्चों से कहा कि देश का भविष्य केवल बड़ी-बड़ी योजनाओं से नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के चरित्र और अनुशासन से तय होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे, गाली-गलौज, हिंसा और दूसरी बुरी आदतों से दूर रहने का संकल्प दिलाया तथा माता-पिता और शिक्षकों के सम्मान को जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार बताया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक बनना भी देशभक्ति का ही हिस्सा है। बच्चों की मेहनत, अनुशासन, शिक्षा और अच्छे संस्कार ही आने वाले भारत की वास्तविक ताकत बनेंगे।
समारोह में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रोफेसर शाहिद अख्तर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन की समावेशी विरासत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को आजाद कराने के संघर्ष में शामिल लोग सबसे पहले भारतीय थे और उन्होंने देश के लिए धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज वे जिस स्कूल में बैठकर स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, कल वही विद्यार्थी भारत के भविष्य को दिशा देने वाले नागरिक होंगे। उन्होंने कहा कि देश के सामने अब अगली बड़ी चुनौती विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की है और इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
प्रोफेसर शाहिद अख्तर ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल कर अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ें। उन्होंने विद्यार्थियों से डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों के कुशल पेशेवर बनने का लक्ष्य रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत मिशन का मकसद केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है जो ज्ञान, कौशल और चरित्र के साथ देश के विकास में भागीदार बने। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करने का आह्वान किया।
प्रोफेसर शाहिद अख्तर ने स्कूल की मौजूदा स्थिति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने संस्थान की परिस्थितियों को देखा है और इसके विकास को लेकर जल्द ही संबंधित लोगों के साथ बैठक की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्कूल की स्थिति में सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उनके इस आश्वासन से स्कूल के शिक्षकों और उपस्थित लोगों में भी उम्मीद जगी कि संस्थान के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे।
समारोह के दौरान स्कूली बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर स्वतंत्रता दिवस की भावना को जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में देशभक्ति, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के प्रति सम्मान की झलक दिखाई दी। बच्चों के उत्साह और प्रस्तुतियों ने समारोह में मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत इस्माइल भोरे और स्कूल के शिक्षकों ने किया, जबकि समारोह का संचालन स्कूल मास्टर मोइन ने किया।
इस अवसर पर हाफिज जमील, पत्रकार फरजान कुरैशी, पूर्व पार्षद इमरान इस्माइल, इमरान चौधरी, डॉ. सरदार खान, हाफिज सबरीन, शेहला नवाब और अब्दुल मलिक मुस्तफा कुरैशी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समारोह का संदेश स्पष्ट था—आजादी केवल विरासत में मिली उपलब्धि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी भी है। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए अब भारत को शिक्षा, अनुशासन, सामाजिक एकता और विकास के रास्ते पर आगे ले जाना ही नई पीढ़ी का सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म है।




