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89% रेलवे स्टेशन बुनियादी सुविधाओं में फेल, CAG की ऑडिट रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल

CAG की ऑडिट रिपोर्ट ने रेलवे की बुनियादी सुविधाओं पर बड़ा सवाल खड़ा किया है—512 में 458 यानी 89% स्टेशनों पर जरूरी यात्री सुविधाओं की कमी मिली। पंखे, पीने का पानी, बैठने की जगह, शौचालय और प्लेटफॉर्म शेल्टर जैसी मूल जरूरतें कई स्टेशनों पर अब भी अधूरी हैं। आधुनिक ट्रेनें और भव्य स्टेशन जरूरी हैं, लेकिन रेलवे की असली कसौटी वह आम यात्री है जो प्लेटफॉर्म पर सुविधा और सम्मान के साथ अपनी ट्रेन का इंतजार करता है।

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 अगस्त 2026

भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा कहा जाता है, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर सामने रखी है। CAG और रेलवे अधिकारियों की संयुक्त टीम ने देश के 512 रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया, जिसमें 458 स्टेशन यानी करीब 89 फीसदी ऐसे पाए गए जहां एक या उससे अधिक जरूरी यात्री सुविधाओं की कमी थी। रिपोर्ट के मुताबिक केवल 54 स्टेशन यानी 11 फीसदी ऐसे मिले जहां न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं को लेकर कोई कमी नहीं पाई गई।

ऑडिट में सामने आई कमियां केवल किसी एक सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यात्रियों की रोजमर्रा की जरूरतों से सीधे जुड़ी हैं। करीब 42 फीसदी स्टेशनों पर पंखों, 40 फीसदी पर वाटर कूलर, 27 फीसदी पर पीने के पानी के नलों, 22 फीसदी पर यूरिनल, 15 फीसदी पर बैठने की व्यवस्था, 13 फीसदी पर प्लेटफॉर्म शेल्टर, जबकि 12 फीसदी स्टेशनों पर शौचालय और घड़ियों जैसी जरूरी सुविधाओं में कमी पाई गई। यानी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों के लिए गर्मी से राहत, पीने का पानी, बैठने की जगह, शौचालय और बारिश या धूप से बचाव जैसी बुनियादी जरूरतें भी कई जगह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हैं।

CAG की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय रेलवे लगातार आधुनिकीकरण, वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों, स्टेशन पुनर्विकास और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं की दिशा में बड़े बदलाव का दावा कर रहा है। ऐसे में 512 स्टेशनों के ऑडिट में लगभग नौ में से आठ स्टेशनों पर किसी न किसी आवश्यक सुविधा की कमी मिलना व्यवस्था के जमीनी स्तर पर सवाल खड़े करता है। आधुनिक ट्रेनों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ यह भी जरूरी है कि आम यात्री जिस प्लेटफॉर्म पर खड़ा होकर ट्रेन का इंतजार करता है, वहां उसे साफ पानी, पर्याप्त पंखे, बैठने की जगह, शौचालय और मौसम से बचाव जैसी बुनियादी सुविधाएं भी समय पर मिलें।

यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं है। रेलवे स्टेशनों पर सबसे ज्यादा निर्भरता आम यात्रियों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दूरदराज के इलाकों से आने वाले लोगों की होती है। लंबे इंतजार के दौरान अगर प्लेटफॉर्म पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो, गर्मी में पंखे या ठंडे पानी की सुविधा न मिले अथवा शौचालय जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी न हों, तो इसका सीधा असर यात्रियों के अनुभव और सुविधा पर पड़ता है। इसलिए रेलवे के विकास का मूल्यांकन केवल ट्रेनों की गति, नए कोच या बड़े स्टेशनों की खूबसूरती से नहीं, बल्कि उस आम यात्री की सुविधा से भी होना चाहिए जो रोज रेलवे पर भरोसा करके अपनी यात्रा करता है।

CAG के आंकड़े रेलवे के सामने एक स्पष्ट चुनौती भी रखते हैं—बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ छोटी लेकिन जरूरी सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए। स्टेशन चाहे महानगर में हो या छोटे शहर में, यात्री की मूलभूत जरूरतें समान हैं। रिपोर्ट में सामने आई कमियों को केवल प्रशासनिक आंकड़ा मानकर छोड़ने के बजाय समयबद्ध तरीके से दूर करना जरूरी है। रेलवे स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाओं की नियमित निगरानी, जवाबदेही तय करने और कमियों को दूर करने की स्पष्ट व्यवस्था हो तो यात्रियों का अनुभव काफी बेहतर हो सकता है।

रेलवे की असली तस्वीर सिर्फ दौड़ती हुई ट्रेन नहीं, बल्कि वह प्लेटफॉर्म भी है जहां लाखों यात्री हर दिन उसका इंतजार करते हैं। CAG की रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि आधुनिक रेलवे का सपना तभी पूरा होगा, जब उसकी बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही मजबूत हों।

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