राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 अगस्त 2026
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बच्चों को माफ करने’ वाले वीडियो के बाद अब उन्हीं से एक और वीडियो जारी करने की मांग की है। दीपके ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही है, लेकिन अब उन्हें 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के लिए भी माफी मांगनी चाहिए। दीपके ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री उन बच्चियों और छात्राओं से माफी मांगेंगे, जिनके साथ उनके अनुसार पुलिस ने बेरहमी की।
‘उम्मीद है मोदी जी आज एक और वीडियो डालेंगे’
दीपके ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में प्रधानमंत्री के संदेश का जिक्र करते हुए कहा, “कल हम सभी ने मोदी जी का वीडियो देखा, जिसमें वह कह रहे थे कि वह बच्चों को माफ कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वह एक और वीडियो अपलोड करेंगे, जिसमें उम्मीद है कि वह 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के लिए माफी मांगेंगे।” दीपके का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री प्रदर्शनकारियों को ‘अपने बच्चे’ मानते हैं, तो उनके साथ पुलिस के कथित व्यवहार पर भी संवेदनशीलता दिखनी चाहिए।
दीपके का गंभीर आरोप—‘12 साल की बच्चियों के सिर पर मारा गया’
दीपके ने पुलिस कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान “12 साल की बच्चियों के सिर पर पुलिस ने मारा, महिलाओं के कपड़े फटे और लड़कियों के निजी अंगों पर भी चोट पहुंचाई गई।” दीपके ने कहा कि प्रधानमंत्री को उन लड़कियों से माफी मांगनी चाहिए जिनके साथ कथित तौर पर ऐसी कार्रवाई हुई। ये आरोप दीपके के बयान पर आधारित हैं और पुलिस कार्रवाई की पूरी परिस्थितियों तथा इन विशिष्ट आरोपों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण है।
मोदी ने कहा था—‘ये हमारे बच्चे हैं, सजा नहीं सही रास्ता दिखाने की जरूरत’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जारी वीडियो संदेश में जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान अपने और अपनी दिवंगत मां के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि ऐसी भाषा किसी सभ्य समाज के अनुकूल नहीं है, लेकिन इन छात्रों को सजा देने, अदालतों के चक्कर लगवाने या समाज में परेशान करने के बजाय उन्हें सही रास्ता दिखाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनकारियों को ‘भटके हुए बच्चे’ बताते हुए कहा था कि वह उन्हें माफ करना चाहते हैं और समाज को भी ऐसा ही करना चाहिए।
‘दांत और जीभ दोनों अपने हैं’—मोदी ने दिया था उदाहरण
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा था कि कभी-कभी जीभ दांतों के नीचे आ जाती है और खून भी निकल जाता है, लेकिन हम अपने दांत नहीं तोड़ देते, क्योंकि दांत भी अपने हैं और जीभ भी अपनी है। इसी तरह उन्होंने कहा कि बच्चे भी अपने हैं। उन्होंने युवाओं से पिछली बातों को पीछे छोड़कर देश के लिए आगे बढ़ने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की थी।
दीपके ने उसी ‘माफी’ को बनाया जवाबदेही का सवाल
अब दीपके ने प्रधानमंत्री के इसी संदेश को पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही से जोड़ दिया है। उनका सवाल है कि यदि प्रदर्शनकारी बच्चे ‘अपने’ हैं, तो कथित पुलिस ज्यादती के शिकार बच्चे भी अपने ही हैं। ऐसे में केवल उनकी भाषा पर चर्चा क्यों हो और उनके साथ हुए कथित बल प्रयोग पर जवाबदेही क्यों न तय की जाए? दीपके की मांग है कि जिस तरह प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनकारियों की कथित अभद्र भाषा पर सार्वजनिक वीडियो जारी किया, उसी तरह पुलिस कार्रवाई में घायल छात्र-छात्राओं के लिए भी सार्वजनिक रूप से संवेदना और माफी सामने आनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की भाषा गलत तो पुलिस की कथित ज्यादती पर भी उठेंगे सवाल
इस विवाद में दो मुद्दों को अलग-अलग देखने की जरूरत है। किसी प्रधानमंत्री, नेता या उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक विरोध का आदर्श तरीका नहीं माना जा सकता। लेकिन किसी प्रदर्शनकारी की गलत भाषा पुलिस को कानून से बाहर जाकर बल प्रयोग करने का अधिकार भी नहीं देती। यदि प्रदर्शनकारियों के व्यवहार की जांच हो सकती है, FIR दर्ज हो सकती है और सार्वजनिक बहस हो सकती है, तो पुलिस के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग भी उतनी ही स्वाभाविक है।
इसीलिए दीपके का सवाल अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है—प्रधानमंत्री ने कहा कि “बच्चे अपने हैं”; तो क्या उन बच्चों से भी माफी मांगी जाएगी, जो 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई में कथित तौर पर घायल हुए?




