अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बिश्केक | 1 सितंबर 2026
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने चीन-रूस रिश्तों की बढ़ती नजदीकी के बीच एक अहम मुद्दे को सामने ला दिया—दोनों देशों के बीच मौजूदा वीजा-मुक्त यात्रा व्यवस्था को स्थायी बनाने की संभावना। 31 अगस्त को हुई बातचीत में पुतिन ने संकेत दिया कि रूस चीन के साथ मौजूदा वीजा-फ्री व्यवस्था को स्थायी बनाने की दिशा में काम करने के लिए तैयार है, यदि चीन भी इसे उपयोगी और आवश्यक मानता है। हालांकि, इसे अभी अंतिम समझौता या स्थायी वीजा-मुक्त व्यवस्था की घोषणा नहीं माना जा सकता। यह रूस की ओर से व्यक्त की गई इच्छा और आगे की बातचीत का संकेत है।
इस प्रस्ताव की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि चीन और रूस के बीच लोगों की आवाजाही और पर्यटन में तेजी दिखाई दे रही है। पुतिन के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में दोनों देशों के बीच पर्यटन यातायात में करीब 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ऐसे में यदि वीजा-मुक्त यात्रा व्यवस्था को स्थायी रूप दिया जाता है तो इसका असर केवल पर्यटकों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि कारोबार, निवेश, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क को भी बढ़ावा मिल सकता है। यानी दोनों सरकारें अपने रणनीतिक रिश्तों को केवल शीर्ष नेताओं की बैठकों तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिकों के स्तर तक विस्तार देने की कोशिश करती दिखाई दे रही हैं।
मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने मई 2026 में पुतिन की चीन यात्रा का उल्लेख किया और कहा कि उस समय दोनों नेताओं ने चीन-रूस संबंधों को उच्च स्तर और उच्च गुणवत्ता तक ले जाने की रणनीतिक दिशा तय की थी। शी के अनुसार दोनों देशों के संबंधित विभाग उन सहमतियों को लागू करने के लिए काम कर रहे हैं और द्विपक्षीय सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद चीन और रूस को अपने रणनीतिक सहयोग को बनाए रखना और मजबूत करना चाहिए।
शी ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति में अनिश्चितता और अप्रत्याशितता बढ़ रही है, लेकिन दुनिया के लोगों की शांति, विकास, सहयोग और साझा लाभ की आकांक्षा नहीं बदली है। चीन और रूस इसी पृष्ठभूमि में अपने व्यापक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता आर्थिक और राजनीतिक संपर्क वैश्विक शक्ति-संतुलन में उनके रिश्तों की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।
राष्ट्रपति पुतिन ने भी चीन के साथ रूस के संबंधों को महत्वपूर्ण बताते हुए दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को रेखांकित किया। बातचीत में डिजिटल नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी महत्व दिया गया। यह संकेत देता है कि चीन-रूस साझेदारी का दायरा पारंपरिक ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग से आगे बढ़कर नई तकनीकों और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच रहा है।
वीजा-मुक्त यात्रा का मुद्दा आम नागरिकों के लिए सीधे मायने रखता है। यदि भविष्य में दोनों देश इसे स्थायी व्यवस्था में बदलने पर सहमत होते हैं तो चीन और रूस के नागरिकों के लिए एक-दूसरे के देश की यात्रा आसान हो सकती है। इससे पर्यटन उद्योग को लाभ मिलने के साथ कारोबारी यात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क भी बढ़ सकता है। लेकिन यहां तथ्यात्मक सावधानी जरूरी है—31 अगस्त की बैठक में स्थायी वीजा-फ्री व्यवस्था लागू करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल रूस ने मौजूदा व्यवस्था को स्थायी बनाने की दिशा में काम करने की इच्छा जताई है।
चीन और रूस के बीच यह बातचीत SCO के बड़े भू-राजनीतिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। बिश्केक में SCO सदस्य देशों के नेता ऐसे समय जुटे हैं जब दुनिया युद्धों, आर्थिक प्रतिबंधों, व्यापारिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। चीन और रूस दोनों बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं और SCO उनके लिए क्षेत्रीय सहयोग तथा वैश्विक दक्षिण और पूर्व के देशों के साथ संपर्क मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।
शी जिनपिंग और पुतिन की बिश्केक मुलाकात इस वर्ष दोनों नेताओं की आमने-सामने की दूसरी बैठक के रूप में सामने आई। इससे पहले मई 2026 में पुतिन ने चीन की राजकीय यात्रा की थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी। बिश्केक में हुई बातचीत उसी रणनीतिक निरंतरता का हिस्सा दिखाई देती है।
इस मुलाकात का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि दुनिया में जहां एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और प्रतिबंधों का दौर चल रहा है, वहीं चीन और रूस लोगों के बीच आवाजाही आसान बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं। वीजा की बाधाएं कम करना सुनने में भले ही पर्यटन से जुड़ा सामान्य फैसला लगे, लेकिन इसके पीछे व्यापार, निवेश, शिक्षा, पर्यटन और नागरिक संपर्क का बड़ा आर्थिक नेटवर्क खड़ा हो सकता है।
फिलहाल तस्वीर बिल्कुल साफ है—स्थायी वीजा-फ्री व्यवस्था अभी बनी नहीं है, लेकिन रूस ने उसे स्थायी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जरूर जाहिर कर दी है। अब इस प्रस्ताव पर चीन की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच होने वाली आगे की बातचीत महत्वपूर्ण होगी। अगर यह व्यवस्था वास्तव में स्थायी रूप लेती है, तो चीन-रूस रणनीतिक साझेदारी का एक ऐसा चेहरा सामने आएगा जिसका सीधा असर दोनों देशों के आम नागरिकों पर पड़ेगा।
बिश्केक की इस मुलाकात ने एक बात जरूर स्पष्ट कर दी है—मॉस्को और बीजिंग अपने रिश्तों को केवल सत्ता, रणनीति और भू-राजनीति के स्तर पर नहीं छोड़ना चाहते। व्यापार से लेकर तकनीक तक और रणनीतिक साझेदारी से लेकर नागरिकों की आवाजाही तक, दोनों देशों के रिश्तों का दायरा लगातार बड़ा हो रहा है। अब देखना यह है कि वीजा-मुक्त यात्रा का यह अस्थायी रास्ता कब स्थायी व्यवस्था में बदलता है।




