राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 जून 2026
देश में जनसंख्या बदलाव और अवैध प्रवासन से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Demographic Changes) समिति अब विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की भी समीक्षा कर सकती है। सूत्रों के अनुसार समिति ने विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित दस्तावेज और आंकड़े मांगे हैं तथा अपने पहले ही बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की है।
गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को अधिसूचित इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं। समिति ने मंगलवार को अपनी पहली बैठक आयोजित की, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों में जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलाव, अवैध प्रवासन और उससे जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार समिति उन 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के प्रभावों का भी अध्ययन कर सकती है, जहां मतदाता सूचियों का व्यापक सत्यापन किया गया था। इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नामों को सूची से हटाए जाने को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए थे। ऐसे में समिति यह जानने का प्रयास करेगी कि नाम हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और नियमसम्मत थी तथा कहीं पात्र नागरिकों के नाम तो नहीं हटाए गए।
सूत्रों का कहना है कि समिति का मुख्य उद्देश्य देश में जनसंख्या परिवर्तन के कारणों, उसके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों तथा अवैध प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों का व्यापक अध्ययन करना है। इसके साथ ही समिति सरकार को ऐसी सिफारिशें भी देगी जिससे अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान, हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, कानूनी और समयबद्ध बनाई जा सके।
समिति ने विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संबंधित एजेंसियों से आंकड़े और रिपोर्ट मांगी हैं। इनमें जनसंख्या वृद्धि के रुझान, सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति, मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े दस्तावेज और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटाए गए, जबकि चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारी लगातार कहते रहे हैं कि सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक थी। अब यदि समिति इस विषय का अध्ययन करती है तो इससे इस विवाद पर और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या परिवर्तन और अवैध प्रवासन का मुद्दा आने वाले वर्षों में देश की राजनीति, सुरक्षा और संसाधनों के वितरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने इस विषय पर व्यापक अध्ययन के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
फिलहाल समिति ने विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले महीनों में इसके अध्ययन और सिफारिशों पर देशभर की नजर रहेगी, क्योंकि इसकी रिपोर्ट भविष्य में नागरिकता, मतदाता सूची, सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन से जुड़ी नीतियों को प्रभावित कर सकती है।



