राष्ट्रीय राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 जून 2026
लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी राजनीति में आए उतार-चढ़ाव और हालिया राजनीतिक तनाव के बीच INDIA गठबंधन 8 जून को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। इस बैठक को विपक्षी एकता के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार लगभग 17 विपक्षी दलों के नेता इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। खास बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी और द्रमुक (DMK) के प्रतिनिधियों के भी बैठक में शामिल होने की संभावना है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा ममता बनर्जी और DMK की भूमिका को लेकर हो रही है। ममता बनर्जी पिछले कुछ समय से INDIA गठबंधन से दूरी बनाए हुए थीं और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर उन्होंने स्वतंत्र रुख अपनाया था। ऐसे में उनकी संभावित मौजूदगी को विपक्षी एकजुटता के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
वहीं तमिलनाडु की राजनीति में हाल में हुए बड़े बदलावों के कारण DMK और कांग्रेस के संबंधों में तनाव की खबरें सामने आई हैं। कांग्रेस द्वारा राजनीतिक समीकरण बदलने और तमिलनाडु की नई सत्ता व्यवस्था में शामिल होने के बाद DMK ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। DMK सांसद कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपने दल के सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग सीटें आवंटित करने की मांग भी की थी। इस कदम को दोनों दलों के बीच बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा गया।
ऐसे माहौल में 8 जून की बैठक INDIA गठबंधन के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गई है। विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जनता के सामने यह संदेश दे कि आंतरिक मतभेदों के बावजूद गठबंधन अभी भी मजबूत और सक्रिय है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ममता बनर्जी और DMK नेतृत्व बैठक में सक्रिय भागीदारी करता है तो इससे विपक्षी एकता को नई मजबूती मिल सकती है।
बैठक में संसद के आगामी सत्र, विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, चुनावी रणनीति, महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर संयुक्त रुख तैयार करने पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति बनाने और संसद के भीतर तथा बाहर समन्वित आंदोलन की रूपरेखा भी तय कर सकते हैं।
हाल के महीनों में INDIA गठबंधन के कई घटक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कुछ अन्य राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने अपने-अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी है, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि विपक्षी नेताओं का दावा है कि भाजपा के खिलाफ लोकतांत्रिक और राजनीतिक लड़ाई के लिए गठबंधन पहले की तरह प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बैठक केवल औपचारिक आयोजन नहीं होगी, बल्कि इससे यह तय होगा कि विपक्ष आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना किस प्रकार करेगा। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बदले राजनीतिक समीकरणों के बाद गठबंधन की दिशा और दशा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
8 जून की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि विपक्षी दलों को यह साबित करना है कि व्यक्तिगत और क्षेत्रीय मतभेदों के बावजूद वे राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच बनाए रखने में सक्षम हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी, DMK और अन्य प्रमुख सहयोगी दल इस बैठक में क्या रुख अपनाते हैं और INDIA गठबंधन भविष्य की राजनीति के लिए क्या संदेश देता है।




