राष्ट्रीय / उत्तर प्रदेश | विशेष संवाददाता | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ/मेरठ
594 किमी लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर पर प्रति किलोमीटर दर, दूरी और सुविधाओं का जोड़ बना रहा जेब पर भारी असर
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े और आधुनिक सड़क परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेस-वे पर सफर शुरू होते ही यात्रियों के बीच टोल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मेरठ से प्रयागराज तक एकतरफा यात्रा के लिए करीब ₹1800 तक का टोल सामने आने के बाद कई लोगों को यह सफर महंगा महसूस हो रहा है। पहली नजर में यह रकम जरूर चौंकाती है, लेकिन जब इसके पीछे का पूरा गणित समझ में आता है तो तस्वीर साफ होने लगती है कि यह सिर्फ “महंगा टोल” नहीं, बल्कि दूरी, दर और सुविधाओं का संयुक्त परिणाम है। गंगा एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई करीब 594 किलोमीटर है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी दूरी है। अगर कार के लिए तय टोल दर लगभग ₹2.5 से ₹2.55 प्रति किलोमीटर मानी जाए, तो पूरी दूरी तय करने पर यह रकम करीब ₹1485 के आसपास बैठती है। इसके बाद अलग-अलग सेक्शन के हिसाब से चार्ज, टैक्स, राउंडिंग और कुछ अतिरिक्त शुल्क जुड़ते हैं, जिससे कुल टोल ₹1500 से बढ़कर ₹1800 तक पहुंच जाता है। यानी जो रकम सुनने में ज्यादा लगती है, वह असल में लंबी दूरी और तय दर का सीधा गणित है, न कि अचानक बढ़ा हुआ कोई अलग चार्ज।
यात्रियों को यह सफर महंगा इसलिए भी महसूस होता है क्योंकि 594 किलोमीटर की दूरी छोटी नहीं है। जितनी लंबी दूरी होगी, कुल टोल उतना ही ज्यादा होगा, यह सीधा नियम है। इसके साथ ही यह एक्सप्रेस-वे सामान्य सड़क नहीं है, बल्कि 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जिसमें चौड़ी लेन, बेहतर सुरक्षा, आधुनिक टोल सिस्टम और बेहतर ड्राइविंग अनुभव जैसी सुविधाएं शामिल हैं। ऐसी परियोजनाओं में लागत भी काफी ज्यादा होती है और उसी लागत की भरपाई टोल के जरिए की जाती है।
प्रोजेक्ट पर लगभग ₹36,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है। इतनी बड़ी रकम को वापस पाने के लिए टोल एक जरूरी साधन बनता है। यही कारण है कि दर भले ही अन्य एक्सप्रेस-वे के आसपास ही रखी गई हो, लेकिन दूरी ज्यादा होने के कारण कुल रकम बड़ी दिखाई देती है। अगर तुलना की जाए तो उत्तर प्रदेश के अन्य एक्सप्रेस-वे पर भी ₹2 से ₹2.6 प्रति किलोमीटर के बीच टोल लिया जाता है, इसलिए दर नई नहीं है, बल्कि यहां दूरी ही मुख्य वजह बन रही है।
हालांकि, इस पूरे खर्च के साथ एक बड़ा फायदा भी जुड़ा हुआ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पहले मेरठ से प्रयागराज की यात्रा में 10 से 12 घंटे तक का समय लग जाता था, लेकिन अब यही दूरी करीब 6 घंटे में पूरी हो सकती है। यानी आधे समय में सफर पूरा होना, कम ट्रैफिक, कम थकान और बेहतर सड़क—ये सभी फायदे इस टोल के साथ मिलते हैं। इसके अलावा समय की बचत के साथ ईंधन की भी बचत होती है, जो लंबे सफर में एक बड़ी राहत साबित होती है।
गंगा एक्सप्रेस-वे का ₹1800 तक का टोल पहली नजर में भले ही भारी लगता हो, लेकिन इसके पीछे का गणित साफ है—लंबी दूरी, तय प्रति किलोमीटर दर और आधुनिक सुविधाओं से लैस इंफ्रास्ट्रक्चर। यानी जेब पर असर जरूर है, लेकिन बदले में तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर भी मिल रहा है, जो इस एक्सप्रेस-वे को अलग बनाता है।




