राष्ट्रीय/राजनीति | अरिंदम बनर्जी | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 2 मई 2026
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले ही सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। ईवीएम और स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर राजनीतिक टकराव में बदल गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग पर सीधे-सीधे “एकतरफा फैसले” लेने का आरोप लगाया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे हार का डर और कोरी बकवास बताया है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब टीएमसी नेताओं ने स्ट्रॉन्ग रूम और ईवीएम की निगरानी से जुड़े नियमों में बदलाव पर सवाल उठाए। पार्टी की उम्मीदवार शशि पांजा ने आरोप लगाया कि पहले जहां सभी राजनीतिक दलों और मीडिया को सीसीटीवी फुटेज देखने की सुविधा मिलती थी, अब उस पर पाबंदी लगा दी गई है। उनके मुताबिक, अब केवल सीमित संख्या में एजेंट ही शिफ्ट के हिसाब से वीडियो देख सकते हैं, जो पूरी तरह अनुचित और एकतरफा फैसला है। टीएमसी का कहना है कि इस तरह के बदलाव चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।
दूसरी ओर बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि टीएमसी को अपनी हार साफ दिखाई दे रही है, इसलिए वह पहले से ही माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब “ड्रामेबाजी” है और चुनाव आयोग पर बेवजह दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा भी चर्चा के केंद्र में है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित हैं और वहां बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू है। सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा बल और लगातार निगरानी के जरिए किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना से इनकार किया जा रहा है। इसके बावजूद राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास का माहौल साफ दिखाई दे रहा है।
दरअसल, बंगाल की राजनीति पहले से ही बेहद संवेदनशील रही है, और हर चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है। इस बार भी मतगणना से पहले जिस तरह का तनाव देखने को मिल रहा है, उससे साफ है कि नतीजों से पहले ही सियासी तापमान काफी बढ़ चुका है। नजर 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी है। यह सिर्फ वोटों की गिनती नहीं होगी, बल्कि यह तय करेगी कि किसका दावा सही था और किसकी रणनीति काम आई। फिलहाल बंगाल में माहौल ऐसा है, जहां हर बयान और हर कदम पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।




