अंतरराष्ट्रीय/ टेक्नोलोजी | लुबना आबिदी | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/लंदन | 2 मई 2026
दुनिया की सबसे चर्चित डिजिटल करेंसी Bitcoin अब सिर्फ निवेश का जरिया नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक ताकत की राजनीति का अहम हथियार बनती जा रही है। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन—चारों बड़े खिलाड़ी अब इस डिजिटल दौड़ में उतर चुके हैं और हर देश अपनी रणनीति के साथ इसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि Bitcoin अब तकनीक से आगे बढ़कर वैश्विक शक्ति संतुलन का हिस्सा बन गया है। अमेरिका ने इस दिशा में सबसे आक्रामक रुख दिखाया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ कहा है कि पेंटागन के भीतर Bitcoin से जुड़े कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनकी जानकारी गोपनीय है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह तकनीक भविष्य में अमेरिका की रणनीतिक ताकत बन सकती है। इतना ही नहीं, अमेरिकी सेना खुद Bitcoin नेटवर्क पर नजर रख रही है और अपना नोड चला रही है। इसका मतलब साफ है कि अमेरिका अब सिर्फ इस डिजिटल करेंसी को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे अपने सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनाने में जुट गया है। रूस, चीन और ब्रिटेन भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं।
रूस तेजी से Bitcoin माइनिंग में अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है और दुनिया के बड़े खिलाड़ियों में शामिल हो गया है। चीन ने भले ही आधिकारिक तौर पर क्रिप्टो पर रोक लगा रखी हो, लेकिन जमीन पर उसकी मौजूदगी अभी भी मजबूत बताई जाती है। दोनों देश अब डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार, खासकर ऊर्जा सौदों में बढ़ा रहे हैं, ताकि अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके। यही वजह है कि यह पूरा खेल अब सीधे-सीधे अमेरिका बनाम रूस-चीन की रणनीतिक टक्कर में बदलता नजर आ रहा है।
इस बीच यूनाइटेड किंगडम ने इस ‘डिजिटल जंग’ में अलग रास्ता अपनाया है। ब्रिटेन Bitcoin को हथियार के बजाय आर्थिक अवसर के रूप में देख रहा है। लंदन, जो पहले से ही दुनिया का बड़ा वित्तीय केंद्र है, अब क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स का हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार नियमों को सरल बना रही है, निवेशकों को आकर्षित कर रही है और यह कोशिश कर रही है कि Bitcoin को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में जगह दी जाए।
हालांकि, ब्रिटेन पूरी तरह बेफिक्र भी नहीं है। वह सुरक्षा को लेकर सतर्क है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि Bitcoin का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों या प्रतिबंधों से बचने के लिए न हो। इसके लिए वह अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ मिलकर निगरानी और सहयोग को मजबूत कर रहा है।
पूरी तस्वीर देखें तो साफ होता है कि Bitcoin अब सिर्फ डिजिटल पैसा नहीं, बल्कि ताकत, तकनीक और प्रभाव का नया हथियार बन चुका है। अमेरिका इसे रणनीतिक शक्ति में बदल रहा है, ब्रिटेन इसे आर्थिक ताकत बना रहा है, जबकि रूस और चीन इसे वैश्विक वित्तीय संतुलन बदलने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
आने वाले समय में यह मुकाबला और तेज होने वाला है, जहां लड़ाई सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी लड़ी जाएगी। Bitcoin इस नई वैश्विक जंग का केंद्र बन चुका है—और अब हर बड़ी ताकत इसे अपने पक्ष में झुकाने की कोशिश कर रही है।




