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क्या जलवायु परिवर्तन रोक देगा इंसानों की लंबाई बढ़ना? नई रिसर्च ने बढ़ाई चिंता

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अंतरराष्ट्रीय/स्वास्थ्य | गुफरान अहमद | ABC NATIONAL NEWS | लंदन/ वाशिंगटन | 2 मई 2026

दुनिया में पिछले डेढ़ सौ सालों से इंसानों की औसत लंबाई लगातार बढ़ती रही है, लेकिन अब वैज्ञानिकों को डर है कि यह सिलसिला थम सकता है। वजह है तेजी से बढ़ता जलवायु परिवर्तन। नई रिसर्च में सामने आया है कि बढ़ती गर्मी और नमी बच्चों के शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है, खासकर उनकी लंबाई पर। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने दक्षिण एशिया के दो लाख छोटे बच्चों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इस अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों ने गर्भ में रहते हुए ज्यादा गर्मी और नमी का सामना किया, उनकी लंबाई सामान्य से कम रह सकती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ऐसे बच्चों की लंबाई करीब 13 प्रतिशत तक कम हो सकती है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा संकेत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे की लंबाई केवल दिखावे की बात नहीं होती, बल्कि यह उसके पूरे स्वास्थ्य और विकास का संकेत होती है। अगर बचपन में ही ग्रोथ प्रभावित होती है, तो इसका असर आगे चलकर शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ती हीटवेव और उमस अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं रह गई, बल्कि यह सीधे इंसानी शरीर को प्रभावित कर रही है।

इतिहास पर नजर डालें तो इंसानों की लंबाई हमेशा एक जैसी नहीं रही। अलग-अलग दौर में इसमें उतार-चढ़ाव आया है। जब जीवनशैली बदली, बीमारियां बढ़ीं या मौसम में बड़े बदलाव आए, तब लोगों की औसत लंबाई भी प्रभावित हुई। वैज्ञानिक मानते हैं कि आज का जलवायु संकट भी कुछ वैसा ही असर डाल सकता है।

एक और दिलचस्प बात यह है कि दुनिया के सबसे लंबे कद वाले देशों में भी अब लंबाई बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ गई है। उदाहरण के तौर पर नीदरलैंड, जहां लोग सबसे लंबे माने जाते हैं, वहां भी नई पीढ़ी की औसत लंबाई में हल्की गिरावट देखी गई है। इसके पीछे खानपान, जीवनशैली और पर्यावरण जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लंबाई सिर्फ जीन से तय नहीं होती, बल्कि पोषण, साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक हालात भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अगर जलवायु परिवर्तन की वजह से खेती, पानी और जीवनशैली पर असर पड़ेगा, तो उसका सीधा असर बच्चों की ग्रोथ पर दिख सकता है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या आने वाले समय में इंसानों की लंबाई बढ़ना सच में रुक जाएगा? इसका जवाब अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के शरीर और भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।

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