राष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 मई 2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने पार्टी प्रवक्ता Pawan Khera को Supreme Court of India से मिली अग्रिम जमानत पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “संविधान की जीत” बताया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र में कानून और संविधान सर्वोच्च हैं तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा हर हाल में की जाएगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को दर्ज मामलों में अग्रिम जमानत देते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि खेड़ा जांच में पूरा सहयोग करेंगे, बुलाए जाने पर संबंधित थाने में पेश होंगे और किसी भी तरह से सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। इसके अलावा, उन्हें बिना अदालत की अनुमति देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट जरूरत पड़ने पर जमानत की शर्तों में बदलाव कर सकता है।
यह मामला असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी Riniki Bhuyan Sarma को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है। पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके खिलाफ कुछ आरोप लगाए थे, जिसके बाद इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया और असम में एफआईआर दर्ज कराई गई। सरमा परिवार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद और भ्रामक बताया था।
गौरतलब है कि इस मामले में पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला मुख्य रूप से मानहानि से जुड़ा है और इसमें गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने जांच के लिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत पर जोर दिया।
सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए खेड़ा को राहत प्रदान की गई है। इस फैसले से कांग्रेस को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है और पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया है।
जयराम रमेश ने कहा कि यह फैसला उन सभी लोगों के लिए संदेश है जो लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, लेकिन न्यायपालिका ने संतुलन बनाए रखा है।
सत्तापक्ष ने पहले ही पवन खेड़ा के बयान को अनुचित और आपत्तिजनक बताया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का पालन करना जरूरी है और किसी भी प्रकार की गलत जानकारी फैलाना गंभीर मामला है।





