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ईरान पर लंबी नाकेबंदी की तैयारी में अमेरिका, वेस्ट एशिया में बढ़ा तनाव

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अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | तेहरान / नई दिल्ली | 30 अप्रैल 2026

वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और गहराता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Donald Trump ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों को ईरान के बंदरगाहों की लंबी नाकेबंदी की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद तेहरान पर दबाव बनाकर उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी नेतृत्व को यह भरोसा नहीं है कि ईरान ईमानदारी से बातचीत कर रहा है। इसी वजह से अब सख्त कदम उठाने की रणनीति बनाई जा रही है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अगले 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) को रोक दे और उसके बाद भी कड़े प्रतिबंधों को स्वीकार करे।

इसी बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth को भी कांग्रेस के सामने इस युद्ध को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा है। यह पहली बार है जब ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद उन्हें संसद में जवाब देना पड़ रहा है। विपक्षी दलों ने इस युद्ध को महंगा और बिना मंजूरी के लिया गया फैसला बताया है।

अमेरिकी संसद की सशस्त्र सेवा समिति में हो रही सुनवाई के दौरान रक्षा बजट पर भी चर्चा हो रही है, जिसे बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का प्रस्ताव है। इसमें ड्रोन, मिसाइल रक्षा प्रणाली और नौसेना की ताकत बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

दूसरी ओर ईरान ने साफ कहा है कि अब अमेरिका दुनिया के देशों पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकता। ईरान का कहना है कि वह अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है और किसी भी दबाव के आगे झुकेगा नहीं।

इस तनाव का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। हालांकि हाल में कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

इसी बीच लेबनान जैसे देशों में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक वहां लाखों लोगों के सामने खाने का संकट खड़ा हो सकता है, क्योंकि युद्ध और विस्थापन का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। वेस्ट एशिया का यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत का रास्ता निकलता है या टकराव और बढ़ता है।

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