राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/कोलकाता | 6 मई 2026
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों के बाद सियासी विवाद और गहरा गया है। Mamata Banerjee ने हार के बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और चुनाव नतीजों पर सवाल उठाए हैं। उनके इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कोई मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ता तो संविधान में क्या व्यवस्था है और राज्यपाल के पास क्या विकल्प होते हैं।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और यदि मुख्यमंत्री सदन में बहुमत खो देता है, तो उसे पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होता। ऐसी स्थिति में राज्यपाल उनसे इस्तीफा मांग सकते हैं। अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो राज्यपाल उसे पद से हटा भी सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। इसके बाद नई विधानसभा का गठन होगा और नई सरकार शपथ लेगी। इस प्रक्रिया में पुराने मुख्यमंत्री का पद स्वतः समाप्त माना जाता है, चाहे उन्होंने औपचारिक इस्तीफा दिया हो या नहीं। हालांकि, परंपरा यही रही है कि चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री खुद इस्तीफा देकर नई सरकार के लिए रास्ता साफ करते हैं।
एक अन्य विकल्प यह भी है कि यदि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो राज्यपाल केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजकर Article 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।
ममता बनर्जी ने चुनाव नतीजों को साजिश करार देते हुए कहा है कि उनकी पार्टी को जनता ने नहीं, बल्कि व्यवस्था ने हराया है। उन्होंने लगभग 100 सीटों पर जनादेश प्रभावित होने का आरोप लगाया है और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
बंगाल की राजनीति को असाधारण मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां संवैधानिक परंपराएं, राजनीतिक दावे और प्रशासनिक प्रक्रिया—तीनों एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं। अब निगाहें राज्यपाल और आगामी सरकार गठन की प्रक्रिया पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में तस्वीर साफ करेंगी।




