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लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति खारिज, भारत ने बताया अनुचित

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 मई 2026

भारत ने लिपुलेख दर्रे के जरिए होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को सख्ती से खारिज कर दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि यह मार्ग कोई नया नहीं, बल्कि दशकों से इस्तेमाल होता रहा है और इस पर सवाल उठाना तथ्यहीन है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक रास्ता रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत की स्थिति हमेशा स्पष्ट रही है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

नेपाल की ओर से सीमा को लेकर उठाए गए दावों पर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस तरह के एकतरफा और कृत्रिम दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते। सरकार का कहना है कि ये दावे न तो ऐतिहासिक साक्ष्यों पर टिकते हैं और न ही जमीनी हकीकत से मेल खाते हैं।

इसके साथ ही भारत ने यह भी संकेत दिया कि वह विवाद को टकराव की बजाय बातचीत से सुलझाना चाहता है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि लंबित सीमा मुद्दों पर नेपाल के साथ संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान संभव है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत-नेपाल संबंधों में सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का यह मार्ग पुराना, स्थापित और निर्विवाद है।

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