Home » International » भारत-चीन सीमा विवाद: 1960 में चीन ने दिया था ‘जमीन के बदले जमीन’ का प्रस्ताव, भारत ने ठुकराया

भारत-चीन सीमा विवाद: 1960 में चीन ने दिया था ‘जमीन के बदले जमीन’ का प्रस्ताव, भारत ने ठुकराया

दुनिया | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/बीजिंग | 6 मई 2026

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के इतिहास में एक ऐसा दौर भी आया था, जब बीजिंग ने विवाद खत्म करने के लिए ‘बार्टर’ यानी जमीन के बदले जमीन का प्रस्ताव दिया था। लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था।

जानकारी के अनुसार, 1959-60 के दौरान चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री Zhou Enlai ने भारत को प्रस्ताव दिया था कि यदि भारत अक्साई चिन पर अपना दावा छोड़ दे, तो चीन अरुणाचल प्रदेश (तत्कालीन NEFA) को भारत का हिस्सा मान लेगा। इस प्रस्ताव का मूल उद्देश्य चीन द्वारा अक्साई चिन में बनाए गए रणनीतिक मार्ग को वैधता दिलाना था।

भारत ने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया। उस समय भी भारत का रुख स्पष्ट था कि देश की एक इंच जमीन पर भी समझौता नहीं किया जाएगा। चीन की रणनीति को भारत ने एक चालाकी भरा कदम माना, जिसके जरिए वह अपने कब्जे को कानूनी रूप देना चाहता था।

दरअसल, चीन के लिए अक्साई चिन का महत्व इसलिए भी ज्यादा था क्योंकि यह इलाका उसके शिंजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाले अहम मार्ग के लिए जरूरी था। चीन ने यहां सड़क निर्माण भी कर लिया था, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया था।

इसके अलावा, चीन लंबे समय से मैकमोहन लाइन को मानने से इनकार करता रहा है और अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिण तिब्बत’ बताता है। ऐसे में भारत को आशंका थी कि यदि अक्साई चिन पर समझौता किया जाता, तो भविष्य में चीन नई मांगों के साथ फिर विवाद खड़ा कर सकता है।

मौजूदा समय में भी भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पर यथास्थिति बहाल हो और किसी भी तरह की बातचीत समानता और संप्रभुता के आधार पर ही हो। 2020 के बाद से सीमा पर बढ़े तनाव के बीच भारत ने अपनी सैन्य और बुनियादी ढांचा क्षमता को तेजी से मजबूत किया है, जिससे रणनीतिक संतुलन में बदलाव आया है।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted