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गद्दार हम नहीं, केजरीवाल हैं : स्वाति मालीवाल

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राजनीति / ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 अप्रैल 2026

दिल्ली की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है, और इस बार वजह बनी हैं Swati Maliwal। आम आदमी पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होते ही मालीवाल ने अपने पुराने नेता Arvind Kejriwal पर सीधा और बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिना किसी हिचक के कहा—“गद्दार हम नहीं हैं, गद्दारी तो केजरीवाल ने की है।” उनके इस बयान ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया है। यह वही स्वाति मालीवाल हैं जो कभी आम आदमी पार्टी के सबसे भरोसेमंद चेहरों में गिनी जाती थीं। पार्टी के शुरुआती दिनों में उन्होंने मजबूती से अपनी भूमिका निभाई और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहीं। लेकिन अब वही नेता खुलकर पार्टी और उसके नेतृत्व पर सवाल उठा रही हैं। मालीवाल का कहना है कि जिस सोच और ईमानदारी के साथ पार्टी की शुरुआत हुई थी, आज वह रास्ता पूरी तरह बदल चुका है। उनके मुताबिक, आंदोलन की भावना कहीं पीछे छूट गई है और उसकी जगह सत्ता और निजी हितों ने ले ली है।

मालीवाल ने अपनी नाराज़गी को सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पार्टी के अंदर के माहौल पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि अब पार्टी में लोकतंत्र जैसा कुछ नहीं बचा है। फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो गए हैं और जो भी आवाज उठाता है, उसे या तो चुप करा दिया जाता है या हाशिये पर डाल दिया जाता है। उन्होंने साफ कहा—“अगर सच बोलना गद्दारी है, तो मैं यह गद्दारी बार-बार करूंगी।” यह बयान उनके मन में जमा गुस्से और निराशा को साफ तौर पर दिखाता है।

भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के अपने फैसले को लेकर मालीवाल ने कहा कि यह कोई जल्दबाज़ी में लिया गया कदम नहीं है। उन्होंने सोच-समझकर यह रास्ता चुना है। उनके मुताबिक, अब वह ऐसे मंच पर हैं जहां उन्हें देशहित में खुलकर काम करने और अपनी बात रखने की आज़ादी मिलेगी। उन्होंने यह भी इशारा किया कि उनके लिए राजनीति सिर्फ पद या शक्ति का साधन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जिसे ईमानदारी से निभाना जरूरी है।

वहीं दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी ने मालीवाल के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह सब राजनीतिक अवसरवाद है। उनका तर्क है कि जब तक मालीवाल पार्टी में थीं, तब तक उन्हें कोई समस्या नहीं दिखी, लेकिन जैसे ही उन्होंने पार्टी छोड़ी, आरोपों की झड़ी लगा दी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के अंदरूनी हालात और नेतृत्व शैली को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

दिल्ली की राजनीति में यह टकराव अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रह गया है। यह एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां हर बयान और हर कदम का असर दूर तक दिख सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मालीवाल के आरोप कितनी राजनीतिक जमीन तैयार करते हैं और आम आदमी पार्टी किस तरह इसका जवाब देती है। फिलहाल, इतना जरूर है कि यह सियासी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है—बल्कि अब असली मुकाबला शुरू हुआ है।

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