[the_ad id="179"]
Home » National » 11 साल से घर का इंतजार, ₹1,159 करोड़ जमा… फिर भी Greenopolis अधूरा

11 साल से घर का इंतजार, ₹1,159 करोड़ जमा… फिर भी Greenopolis अधूरा

राष्ट्रीय/रियल एस्टेट | ABC NATIONAL NEWS | गुरुग्राम | 1 अक्टूबर 2026

2012 में देखा था घर का सपना, 11 साल बाद भी इंतजार

गुरुग्राम के सेक्टर-89 स्थित Greenopolis हाउसिंग प्रोजेक्ट के करीब 1,300 खरीदारों के लिए घर का सपना अब 11 साल लंबे इंतजार में बदल चुका है। वर्ष 2012 में 47 एकड़ में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में लोगों ने अपने घर के लिए करोड़ों रुपये लगाए। Three C Shelters और Orris Infrastructure इस परियोजना से जुड़े डेवलपर थे और खरीदारों को निर्धारित समय में फ्लैट का कब्जा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन 2016 के आसपास निर्माण रुक गया और परियोजना का बड़ा हिस्सा अधूरा रह गया। आज यहां कुछ तैयार इमारतें नजर आती हैं, लेकिन उनके पीछे कई अधूरे टावर खड़े हैं, जो वर्षों से निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

खरीदारों से लिए गए ₹1,159 करोड़, लेकिन बड़ी संख्या में घर अधूरे

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक Three C Shelters ने अपने खरीदारों से करीब ₹776.60 करोड़, जबकि Orris Infrastructure ने करीब ₹383.06 करोड़ लिए थे। दोनों कंपनियों से जुड़ी रकम मिलाकर यह आंकड़ा करीब ₹1,159.66 करोड़ पहुंचता है। खरीदारों का कहना है कि निर्माण रुकने तक वे अपने फ्लैट की कीमत का करीब 80 से 90 फीसदी भुगतान कर चुके थे। प्रोजेक्ट में कुल 1,862 यूनिट की योजना थी, जिनमें करीब 1,650 फ्लैट आवंटित किए गए। लेकिन Phase-2 के 766 और Phase-3 के 584 फ्लैट वाले टावर अब भी अधूरे हैं। यानी जिन परिवारों ने वर्षों पहले अपने घर के लिए बड़ी रकम जमा की, उनमें से बड़ी संख्या आज भी उस घर में रहने का इंतजार कर रही है।

घर नहीं मिला, लेकिन EMI, ब्याज और किराए का बोझ बढ़ता गया

इस विवाद का असर सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं रहा। घर खरीदने के लिए बैंक से कर्ज लेने वाले परिवारों को एक तरफ अधूरे फ्लैट का इंतजार करना पड़ा और दूसरी तरफ EMI तथा ब्याज का बोझ उठाना पड़ा। कई खरीदारों को अपने परिवार के लिए अलग से किराए का मकान लेना पड़ा। 56 वर्षीय विनय भसीन ने भी अपने घर के लिए निवेश किया था, लेकिन 11 साल बाद भी वह किराए के छोटे अपार्टमेंट में रह रहे हैं। उनके मुताबिक, बढ़ती ब्याज दरों ने कर्ज की अवधि बढ़ाई और आखिरकार उन्हें दोस्तों से उधार लेकर अपना लोन बंद करना पड़ा। अब बेरोजगारी और पारिवारिक खर्च के बीच उनकी बचत खत्म होने लगी है और उन्हें अपनी PF की रकम तक निकालनी पड़ी।

रिटायरमेंट करीब, लेकिन अपना घर आज भी नहीं

57 वर्षीय दीपिका मोहिल ने 2013 में Greenopolis में फ्लैट खरीदा था। उन्होंने वर्षों तक होम लोन पर ब्याज चुकाया, लेकिन आर्थिक परेशानी बढ़ने के बाद EMI जारी रखना मुश्किल हो गया। उन्होंने बैंक से दो साल की मोहलत और एकमुश्त समाधान की मांग की, लेकिन उनके मुताबिक उन्हें कानूनी नोटिस का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह घर रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए खरीदा था, लेकिन अब रिटायरमेंट करीब आने के बावजूद वह किराए के मकान में रह रही हैं। उनके मुताबिक, 30 वर्षों की मेहनत से जमा की गई जीवनभर की बचत इस प्रोजेक्ट में लग चुकी है।

किसी ने बेटी के भविष्य के लिए खरीदा घर, किसी ने गहने बेचकर चुकाई किस्त

72 वर्षीय रिटायर्ड बैंकर चित्रंजन गुप्ता ने 2012 में चार बेडरूम का फ्लैट अपनी बेटी के भविष्य को ध्यान में रखकर खरीदा था। उनका इरादा था कि घर मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर इसे बेचकर बेटी की उच्च शिक्षा और भविष्य के लिए आर्थिक मदद की जा सके। लेकिन निर्माण में देरी ने उनकी पूरी योजना बदल दी। दूसरी ओर, सुषमा नाम की खरीदार ने बताया कि निर्माण रुकने के बाद परिवार पर आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया कि उन्हें अपने गहने तक बेचने पड़े। इन खरीदारों की शिकायत सिर्फ घर न मिलने की नहीं है, बल्कि यह भी है कि वर्षों तक पैसा लगाने के बावजूद उन्हें किराए, कर्ज, ब्याज और कानूनी प्रक्रिया का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा।

दिल्ली हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी से जगी नई उम्मीद

अब इस मामले में अदालत के दो ताजा आदेशों से खरीदारों को कुछ उम्मीद मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित की है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना करेंगे। कमेटी का काम वास्तविक खरीदारों की पहचान करना, उन्होंने Three C या Orris में से किसे कितनी राशि का भुगतान किया इसकी जांच करना और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन करना होगा। अदालत ने प्रक्रिया को पारदर्शी और तेजी से पूरा करने पर जोर दिया है और इस काम को करीब आठ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने Three C के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया बहाल की

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने Three C Shelters के खिलाफ चल रही insolvency proceedings को खत्म करने वाले 2023 के NCLAT आदेश को रद्द कर दिया। इससे कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया फिर से आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को NCLT के पास वापस भेजते हुए Resolution Professional, Committee of Creditors और अन्य संबंधित पक्षों, जिसमें होमबायर्स भी शामिल हैं, को सुनकर आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने को भी कहा है। खरीदारों के लिए यह आदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका कहना है कि insolvency प्रक्रिया खत्म होने से उनके सामने अपनी रकम या घर हासिल करने का रास्ता और मुश्किल हो गया था।

11 साल बाद भी सवाल वही—घर कब मिलेगा?

अदालतों के ताजा आदेशों ने इस लंबे विवाद में नई कानूनी हलचल जरूर पैदा की है, लेकिन खरीदारों का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। जिन परिवारों ने 2012-13 में अपने घर के लिए पैसा लगाया था, वे आज 2026 में भी यह जानना चाहते हैं कि उन्हें आखिर अपने फ्लैट का कब्जा कब मिलेगा। किसी की नौकरी चली गई, किसी की रिटायरमेंट करीब आ गई, किसी की बचत खत्म हो रही है और किसी ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी संपत्ति या गहने तक बेच दिए। उनके लिए Greenopolis सिर्फ एक अधूरी बिल्डिंग नहीं, बल्कि वर्षों की कमाई, भविष्य की योजनाओं और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। अब अदालतों के आदेश के बाद असली परीक्षा इस बात की है कि कानूनी प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या 11 साल से अधूरी पड़ी इस परियोजना में घर का सपना आखिरकार पूरा हो पाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *