राजनीति/ पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 अक्टूबर 2026
तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम करने और लोगों से मिलने से रोकने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को मामले में काउंटर-अफिडेविट दाखिल करने को कहा है।
महुआ मोइत्रा की याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य प्रशासन और पुलिस की ओर से उनके खिलाफ लगातार ऐसी परिस्थितियां पैदा की जा रही हैं, जिससे वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से पहुंच और सार्वजनिक गतिविधियां नहीं कर पा रही हैं। याचिका में कथित तौर पर शारीरिक हमले, परिसर से बेदखली, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि यानी MPLADS से जुड़े काम में बाधा, सार्वजनिक बैठकें और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने से रोकने तथा उनके खिलाफ कई FIR दर्ज किए जाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि राज्य के अधिकारियों और पुलिस का इस्तेमाल कर भीड़ तथा कथित तौर पर राजनीतिक समर्थकों के जरिए उनके निर्वाचन क्षेत्र में उनकी आवाजाही और राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित किया जा रहा है। उनका कहना है कि एक निर्वाचित सांसद के तौर पर अपने क्षेत्र के लोगों से मिलना, उनकी समस्याएं सुनना और विकास कार्यों से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाना उनके संसदीय दायित्व का हिस्सा है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार से उनका पक्ष स्पष्ट करने के लिए जवाब मांगा है। अब दोनों सरकारों की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब में यह स्पष्ट होगा कि याचिका में लगाए गए आरोपों पर उनका क्या रुख है और सांसद की ओर से लगाए गए दावों के संबंध में प्रशासन का पक्ष क्या है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक निर्वाचित सांसद द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र में काम करने, जनता से मिलने और राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने में कथित बाधाओं का मुद्दा उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्यवाही में सरकारों के जवाब और याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज अहम होंगे।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत के सामने अब मुख्य सवाल यह होगा कि महुआ मोइत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष क्या है और उनके सांसद के रूप में निर्वाचन क्षेत्र में काम करने के अधिकार से जुड़े विवाद का समाधान किस तरह किया जाता है।



