अंतरराष्ट्रीय / व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 3 जून 2026
भारत समेत 54 देशों के लिए अमेरिका से एक बड़ी आर्थिक चुनौती सामने आई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने प्रस्ताव रखा है कि उन देशों के उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाए, जो कथित रूप से जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं।
यह कार्रवाई USTR द्वारा 60 देशों के खिलाफ शुरू की गई जांच के बाद सामने आई है। अमेरिकी एजेंसी का आरोप है कि कई देशों ने ऐसे उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कानूनी और प्रशासनिक कदम नहीं उठाए, जिनके निर्माण में जबरन श्रम का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क लागू होने की स्थिति में भारत के निर्यातकों पर सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स तथा विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार में जाता है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में महंगा बना सकता है और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को प्रभावित कर सकता है।
इस बीच भारत के प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञों और व्यापार संगठनों ने अमेरिकी प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने भारत सरकार से इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से चुनौती देने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका एकतरफा तरीके से अतिरिक्त शुल्क लगाता है तो यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सिद्धांतों और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर सकता है।
व्यापार जगत का मानना है कि यह मामला केवल मानवाधिकार या श्रम कानूनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नियंत्रण की बड़ी रणनीति भी हो सकती है। हाल के वर्षों में अमेरिका ने कई देशों के खिलाफ व्यापारिक प्रतिबंधों और अतिरिक्त शुल्कों का उपयोग आर्थिक दबाव के साधन के रूप में किया है।
भारत सरकार ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि सूत्रों के अनुसार वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अमेरिकी प्रशासन के साथ कूटनीतिक एवं व्यापारिक स्तर पर बातचीत की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे लागू होने से पहले कई कानूनी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसके बावजूद इस घोषणा ने भारतीय निर्यातकों और उद्योग जगत की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नया तनाव पैदा हो सकता है। ऐसे समय में जब दोनों देश व्यापक व्यापार समझौते और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं, यह मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।




