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शतरंज के सम्राट पर फिर भारी पड़े प्रज्ञानानंदा, दूसरी बार कार्लसन को हराकर मचाया तहलका

खेल | ABC NATIONAL NEWS | ओस्लो | 3 जून 2026

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को दूसरी बार हराकर सनसनी फैला दी है। हालांकि इस शानदार जीत के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि कार्लसन जैसे महान खिलाड़ी को हराना निश्चित रूप से विशेष है, लेकिन टूर्नामेंट के महत्वपूर्ण मोड़ पर मिली जीत उनके लिए उससे भी ज्यादा मायने रखती है।

नॉर्वे चेस 2026 में भारतीय युवा सितारे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब केवल उभरते खिलाड़ी नहीं, बल्कि विश्व शतरंज के शीर्ष खिलाड़ियों को लगातार चुनौती देने वाले दावेदार बन चुके हैं। प्रज्ञानानंदा ने टूर्नामेंट के तीसरे और आठवें दौर में कार्लसन को क्लासिकल मुकाबलों में मात देकर इतिहास रच दिया।

मैग्नस कार्लसन को आधुनिक शतरंज का सबसे महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। क्लासिकल शतरंज में उनकी हार बेहद दुर्लभ मानी जाती है। लेकिन इस बार नॉर्वे चेस में तस्वीर अलग नजर आ रही है। कार्लसन को टूर्नामेंट में अब तक चार हार का सामना करना पड़ा है, जिनमें से दो हार अकेले प्रज्ञानानंदा ने दी हैं।

जीत के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए कार्लसन को हराना गर्व की बात होती है, लेकिन उनका ध्यान केवल एक मैच पर नहीं बल्कि पूरे टूर्नामेंट पर है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण समय पर हासिल की गई जीत खिताब की दौड़ में निर्णायक साबित हो सकती है और यही बात इस सफलता को और खास बनाती है।

भारतीय ग्रैंडमास्टर का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा है। उनकी रणनीति, धैर्य और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता ने दुनिया भर के शतरंज विशेषज्ञों को प्रभावित किया है। खास बात यह है कि प्रज्ञानानंदा लगातार विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और बड़े मंच पर दबाव को भी बखूबी संभाल रहे हैं।

शतरंज जगत के जानकारों का मानना है कि प्रज्ञानानंदा अब उस स्तर पर पहुंच चुके हैं जहां वे किसी भी बड़े टूर्नामेंट के खिताब के प्रबल दावेदार माने जा सकते हैं। कार्लसन के खिलाफ लगातार सफलता ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया है।

भारत के लिए भी यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विश्वनाथन आनंद के बाद भारतीय शतरंज को जिस नए वैश्विक चेहरे की तलाश थी, उसमें प्रज्ञानानंदा सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं। उनकी सफलता भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही है।

नॉर्वे चेस में प्रज्ञानानंदा की शानदार जीतों ने उन्हें खिताब की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा है। अब शतरंज प्रेमियों की निगाहें टूर्नामेंट के आगामी मुकाबलों पर हैं, जहां यह युवा भारतीय खिलाड़ी विश्व शतरंज के शिखर तक पहुंचने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा सकता है।

कार्लसन पर दूसरी जीत के साथ प्रज्ञानानंदा ने साफ संदेश दे दिया है कि भारतीय शतरंज का नया युग पूरी ताकत के साथ दुनिया के सामने खड़ा है।

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