Home » Education / Employment » जामिया में एडमिशन पर बवाल: टॉप रैंक वालों को दरकिनार कर कम रैंक वालों को सीट देने का आरोप

जामिया में एडमिशन पर बवाल: टॉप रैंक वालों को दरकिनार कर कम रैंक वालों को सीट देने का आरोप

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में स्पॉट एडमिशन की प्रक्रिया को लेकर छात्रों का विरोध तेज हो गया है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि कुछ पाठ्यक्रमों में बेहतर रैंक वाले अभ्यर्थियों को सीट नहीं मिली, जबकि उनसे नीचे रैंक वाले उम्मीदवारों को प्रवेश दे दिया गया। NSUI, AISA, SFI और AIRSO से जुड़े छात्रों ने पारदर्शी जांच, कथित तौर पर गलत तरीके से हुए दाखिलों की समीक्षा और आरक्षित सीटों को नियमों के अनुसार भरने की मांग की है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को ‘झूठा, निराधार और बेबुनियाद’ बताया है।

शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 अगस्त 2026

दिल्ली की प्रतिष्ठित केंद्रीय यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एडमिशन प्रक्रिया को लेकर छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। मामला स्पॉट एडमिशन और सीट आवंटन से जुड़ा है। छात्रों का आरोप है कि कुछ मामलों में मेरिट और वेटिंग लिस्ट में ऊपर रहने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि उनसे नीचे रैंक वाले उम्मीदवारों को सीट मिल गई। इसको लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक के सामने लिखित शिकायतें भी दर्ज कराई हैं और 24 अगस्त से सेंट्रल कैंटीन में विरोध-प्रदर्शन शुरू किया।

सबसे प्रमुख शिकायत MA Gender Studies कार्यक्रम से जुड़ी बताई जा रही है। इस पाठ्यक्रम में 30 सीटें हैं। छात्र नेता फैजान अली खान ने दावा किया कि सामान्य वेटिंग लिस्ट में उनकी रैंक 27 थी, जबकि 33 और 40 रैंक वाले उम्मीदवारों को प्रवेश दिया गया। उनका यह भी आरोप है कि मुस्लिम श्रेणी में उनकी रैंक 12 थी, लेकिन उनसे नीचे रैंक वाले उम्मीदवारों को प्रवेश मिल गया। उन्होंने 19 अगस्त को विश्वविद्यालय के कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन के समक्ष लिखित शिकायत देकर स्पॉट एडमिशन सूची और सीट आवंटन के आधार को स्पष्ट करने की मांग की।

छात्रों का कहना है कि इस बार कई पाठ्यक्रमों में सामान्य प्रक्रिया के तहत पहले की तुलना में कम मेरिट लिस्ट जारी की गईं और उसके बाद अचानक स्पॉट एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। फैजान के मुताबिक, आम तौर पर कई चरणों में एडमिशन लिस्ट जारी होती हैं, लेकिन इस बार कुछ पाठ्यक्रमों में केवल दो लिस्ट के बाद स्पॉट राउंड शुरू कर दिया गया। छात्रों का सवाल है कि अगर सीटें खाली थीं तो उन्हें भरने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और चयन का आधार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किया गया।

ALSO READ  नई शिक्षा नीति 2.0 का प्रारूप जारी

विवाद सिर्फ MA Gender Studies तक सीमित नहीं है। B.Ed सामान्य कार्यक्रम की एक अभ्यर्थी इंशा रहमानी ने भी परीक्षा नियंत्रक को शिकायत दी है। उनका दावा है कि मुस्लिम श्रेणी में उनकी रैंक चौथी थी और मुस्लिम OBC श्रेणी में वह पहली रैंक पर थीं। शिकायत के अनुसार, मुस्लिम श्रेणी में छठी रैंक वाले उम्मीदवार को कथित तौर पर सामान्य श्रेणी की सीट पर प्रवेश दिया गया। इंशा ने 17 अगस्त को हुए स्पॉट एडमिशन के संदर्भ में विश्वविद्यालय से अपने मामले की दोबारा समीक्षा करने की मांग की है।

छात्र संगठनों ने स्पॉट एडमिशन की प्रक्रिया को ऑनलाइन से ऑफलाइन किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। AISA की जामिया इकाई ने आरोप लगाया कि कुछ अभ्यर्थियों को स्पॉट राउंड के लिए स्पष्ट जानकारी और पर्याप्त समय के बिना बुलाया गया। संगठन का कहना है कि ऐसी प्रक्रिया दिल्ली-NCR से बाहर रहने वाले छात्रों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है, क्योंकि कम समय में दिल्ली पहुंचने के लिए अतिरिक्त आर्थिक और समय संबंधी दबाव बनता है।

छात्र संगठनों ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित आरक्षित सीटों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि कुछ पाठ्यक्रमों में J&K के निवासियों और कश्मीरी प्रवासियों के लिए निर्धारित सीटों को उचित तरीके से नहीं भरा गया। उदाहरण के तौर पर BArch में दो J&K सीटों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का दावा है कि पात्र उम्मीदवारों के नाम चयनित सूची में आने के बजाय उन्हें वेटिंग लिस्ट में रखा गया और बाद में स्पॉट राउंड में विचार किया गया। AIRSO की जामिया इकाई ने आर्किटेक्चर और फाइन आर्ट्स सहित कुछ पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटों के अलावा PwD सीटों को लेकर भी चिंता जताई है।

ALSO READ  लेह हिंसा: लद्दाख में कर्फ्यू, सोनम वांगचुक बोले— जेल में डालना और मुश्किलें बढ़ाएगा

छात्र संगठनों की मांग है कि यदि कोई आरक्षित सीट खाली है तो उसे निर्धारित नियमों के अनुसार भरा जाए और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक तथा सत्यापन योग्य बनाया जाए। SFI की जामिया इकाई ने भी कथित पक्षपात और मनमाने तरीके से सीट आवंटन के आरोप लगाते हुए कहा है कि पात्र उम्मीदवारों को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश मिलना चाहिए।

वहीं, जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने छात्रों के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवक्ता ने इन आरोपों को ‘झूठा, निराधार और बेबुनियाद’ बताया है। यानी फिलहाल एक तरफ छात्र प्रक्रिया की जांच और एडमिशन की समीक्षा की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन आरोपों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर रहा है।

25 अगस्त को छात्रों और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन छात्र संगठनों के मुताबिक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। NSUI जामिया के सचिव एबिन बेसिल ने दावा किया कि प्रशासन छात्रों की मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था और बैठक विफल रही। छात्रों ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी शिकायतों पर संतोषजनक बातचीत नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रह सकता है।

अब पूरे विवाद का केंद्र यही सवाल है कि जामिया में स्पॉट एडमिशन के दौरान सीट आवंटन किस स्पष्ट मानदंड के आधार पर किया गया। यदि विश्वविद्यालय की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है तो उसे मेरिट, वेटिंग लिस्ट और खाली सीटों के आवंटन का आधार सार्वजनिक करके छात्रों की शंकाएं दूर करनी होंगी। वहीं, यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधार जरूरी होगा।

ALSO READ  विदेशी छात्रों पर लगे प्रतिबंधों के एक साल बाद ऑस्ट्रेलिया को फिर क्यों चाहिए ज़्यादा इंटरनेशनल स्टूडेंट्स?

फिलहाल जामिया का यह विवाद केवल कुछ छात्रों के एडमिशन तक सीमित नहीं रह गया है। यह मेरिट, आरक्षण, पारदर्शिता और विश्वविद्यालयी प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन चुका है। छात्रों का विरोध और प्रशासन का आरोपों से इनकार अब आमने-सामने है। ऐसे में आगे की कार्रवाई और विश्वविद्यालय की ओर से दी जाने वाली विस्तृत सफाई यह तय करेगी कि विवाद खत्म होता है या कैंपस में आंदोलन और तेज होता है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted