राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 अक्टूबर 2026
पंजाब में नशे के कारोबार और उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या, संगरूर के गुलजार सिंह की मौत और मोहंजित सिंह के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट के मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि आखिर नशे के खिलाफ लड़ने वाले लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। इन घटनाओं ने पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाना जानलेवा होता जा रहा है और यह स्थिति भगवंत मान सरकार के शासन में सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नशे के कारोबार के खिलाफ संघर्ष करने वालों के साथ खड़ी है और राज्य के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वाले नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या
मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। झोटा ‘नशा रोको, रोजगार दो’ अभियान से जुड़े थे और क्षेत्र में नशे की समस्या के खिलाफ आवाज उठाते रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 14 अक्टूबर को उन्हें गोली मार दी गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
पंजाब कांग्रेस ने झोटा की हत्या के मामले में आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की थी और कार्रवाई न होने पर पुलिस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी इस घटना को राज्य में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे सरकारी अभियान की प्रभावशीलता से जोड़कर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने इस मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उनके अनुसार, झोटा की शिकायत के बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई, लेकिन बाद में पुलिस ने झोटा के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया। कांग्रेस का सवाल है कि यदि नशे के खिलाफ शिकायत करने वाले व्यक्ति को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े, तो आम नागरिक नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कैसे आगे आएंगे? हालांकि, झोटा के खिलाफ दर्ज मामले का आधार और दोनों मामलों की कानूनी स्थिति पुलिस रिकॉर्ड से स्पष्ट होना जरूरी है।
संगरूर में गुलजार सिंह की मौत, परिवार ने लगाए आरोप
दूसरी घटना मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर से जुड़ी है। 47 वर्षीय मजदूर गुलजार सिंह ने अपने गांव में नशे की उपलब्धता और अपने बेटे की नशे की लत का मुद्दा पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने उठाया था। इसके अगले दिन उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुलजार सिंह ने अपनी मौत से पहले रिकॉर्ड किए गए वीडियो में आरोप लगाया था कि नशे का मुद्दा उठाने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें धमकाया और गांव के सरपंच तथा पंचायत सदस्यों से मिलने के लिए कहा। परिवार और विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने के बाद दबाव और अपमान का सामना करना पड़ा।
इस मामले में पुलिस ने गांव की सरपंच बलजिंदर कौर, उनके पति बलजिंदर सिंह उर्फ राज और पंचायत सदस्य विक्की सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अपने ऊपर किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार किया और कहा कि उन्होंने नशे की आपूर्ति से जुड़े आरोपों पर पुलिस को उचित कार्रवाई करने के लिए कहा था। उन्होंने मामले की जांच की जरूरत पर जोर दिया।
आम आदमी पार्टी की ओर से भी आरोपों का विरोध किया गया था। पार्टी ने कहा कि मामले में कार्रवाई की गई है और सरकार दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए गुलजार सिंह की मौत की परिस्थितियों, कथित दबाव और संबंधित लोगों की भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
मोहंजित सिंह के साथ कथित मारपीट का मामला
राहुल गांधी ने संगरूर जिले के मोहंजित सिंह का मामला भी उठाया। रिपोर्टों के अनुसार, 2 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान मोहंजित सिंह ने नशे की उपलब्धता के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। आरोप है कि उन्हें काला झंडा दिखाने और सवाल उठाने के बाद पुलिस हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया।
इस मामले को लेकर भी राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। दूसरी ओर, पुलिस ने मोहंजित सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों का उल्लेख किया है। हिरासत में कथित यातना के आरोपों की सच्चाई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।
‘नशा रोको, रोजगार दो’ अभियान पर सियासी घमासान
इन तीन घटनाओं ने पंजाब में नशे की समस्या और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि आम आदमी पार्टी सरकार का नशा विरोधी अभियान जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को नशे की आपूर्ति रोकने के साथ-साथ उन नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो अपने गांवों और इलाकों में इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाते हैं।
वहीं, इन घटनाओं को लेकर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई, दर्ज मामलों की स्थिति और जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण हैं। केवल राजनीतिक आरोपों से किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं होती। लेकिन जहां किसी शिकायतकर्ता की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते हैं, वहां निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
पंजाब में नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और हजारों परिवारों की जिंदगी से जुड़ा सवाल है। परविंदर सिंह झोटा की हत्या, गुलजार सिंह की मौत और मोहंजित सिंह के साथ कथित मारपीट के मामलों ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को इन मामलों में जांच की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। अब सबसे जरूरी है कि आरोपों और राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर पीड़ित परिवारों को न्याय मिले और पंजाब के युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई हो।



