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टीएमसी की अंदरूनी जंग चुनाव आयोग पहुंची, ममता और बागी गुट से मांगा जवाब

राजनीति | पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी खींचतान अब औपचारिक रूप से चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच गई है। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने पार्टी के दोनों गुटों—एक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले और दूसरा रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट—को नोटिस जारी कर संगठनात्मक चुनावों और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं (Authorised Signatories) को लेकर किए गए दावों और प्रतिदावों पर जवाब मांगा है।

चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों को 6 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग अब दोनों गुटों के दावों का परीक्षण करेगा और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।

गुरुवार को रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ (Full Bench) से मिला। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में रितब्रत बनर्जी ने आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों का विवरण सार्वजनिक करने से इनकार किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि 22 जून को आयोजित संगठनात्मक अधिवेशन और चुनाव पूरी तरह पार्टी के नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप कराए गए थे।

बागी गुट का दावा है कि उसने पार्टी के संविधान के अनुसार संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी की है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला आधिकारिक गुट इन दावों को स्वीकार नहीं करता। इसी विवाद के कारण अब मामला चुनाव आयोग के समक्ष पहुंचा है।

चुनाव आयोग मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करेगा। पहला, क्या संगठनात्मक चुनाव पार्टी के संविधान और निर्धारित नियमों के अनुसार कराए गए थे। दूसरा, पार्टी की ओर से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर किस पक्ष का दावा वैध है। यदि दोनों गुटों के बीच विवाद और गहरा होता है, तो आयोग को पार्टी की आधिकारिक मान्यता और संगठनात्मक नियंत्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी विचार करना पड़ सकता है।

हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और अलग-अलग नेताओं के बागी रुख ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल चुनाव आयोग ने किसी भी पक्ष के दावों को स्वीकार या खारिज नहीं किया है। आयोग पहले दोनों गुटों से प्राप्त जवाब, दस्तावेज और साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया और संभावित निर्णय सामने आएगा।

अब राजनीतिक हलकों की नजर 6 जुलाई की समयसीमा और उसके बाद चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यह मामला केवल टीएमसी की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों पर भी दूरगामी असर डाल सकता है।

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