[the_ad id="179"]
Home » National » प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत, अब गांव-गांव पहुंचेगा CJP आंदोलन; शिक्षा व्यवस्था बदलने तक संघर्ष का ऐलान

प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत, अब गांव-गांव पहुंचेगा CJP आंदोलन; शिक्षा व्यवस्था बदलने तक संघर्ष का ऐलान

ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ जंतर-मंतर पर 36 दिनों से चल रहा CJP का आंदोलन भले खत्म हो गया हो, लेकिन संगठन ने साफ कर दिया है कि इसे आंदोलन का अंत समझना बड़ी भूल होगी। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का कहना है कि “यह सिर्फ शुरुआत है, अभी लंबा रास्ता तय करना है।” संगठन अब जंतर-मंतर से निकलकर जमीनी स्तर तक पहुंचने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP की प्रमुख मांगों में शामिल था। इस्तीफे के बाद आंदोलन वापस लेने का फैसला हुआ, लेकिन संगठन का कहना है कि एक मंत्री के हटने भर से उन सवालों का समाधान नहीं हो जाता जिनके कारण हजारों छात्र सड़कों पर उतरे थे। पेपर लीक, परीक्षाओं की विश्वसनीयता, छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर लड़ाई जारी रहेगी। दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रदर्शन समाप्त होने का अर्थ आंदोलन समाप्त होना नहीं है।

CJP ने अब उन छात्रों के परिवारों के लिए भी आवाज तेज कर दी है जिनकी परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या से मौत हुई। दीपके ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने मृत छात्रों के परिवारों को अधिकतम संभव मुआवजा देने पर सहमति जताई है, लेकिन CJP अपनी ₹1 करोड़ की मांग पर जोर दे रही है।

संगठन के निशाने पर 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई भी है। CJP आंदोलनकारियों के साथ हुई झड़पों के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई चाहती है। यानी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मिल जाने के बाद आंदोलन का अगला चरण अब केवल शिक्षा मंत्रालय तक सीमित नहीं रहने वाला। परीक्षा सुधार से लेकर पुलिस जवाबदेही और छात्रों के अधिकार तक—CJP इन मुद्दों को आगे ले जाने की तैयारी में है।

CJP प्रवक्ता नेहा बोरा ने आंदोलन को युवाओं की सामूहिक ताकत का प्रमाण बताते हुए कहा कि एकजुट युवा बदलाव ला सकते हैं और यह अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत है। वहीं प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन युवाओं से जुड़े मुद्दे उठाने के साथ शिक्षा और शासन व्यवस्था में सुधार के लिए काम करता रहेगा। संगठन की योजना अपने अभियान को जमीनी स्तर तक ले जाने की है ताकि सत्ता में कोई भी दल या नेता हो, युवाओं की मांगों को नजरअंदाज न कर सके।

सबसे दिलचस्प सवाल अब CJP के राजनीतिक भविष्य को लेकर है। क्या जंतर-मंतर से निकला यह आंदोलन आगे चलकर चुनावी राजनीति में कदम रखेगा? फिलहाल संगठन इसे अपनी प्राथमिकता नहीं बता रहा। सौरव दास के मुताबिक देश में सैकड़ों राजनीतिक दल होने के बावजूद युवाओं की आकांक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए अभी लक्ष्य किसी चुनावी दल में बदलना नहीं बल्कि आंदोलन को गांव और जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।

हालांकि CJP नेतृत्व ने भविष्य में राजनीति में उतरने का रास्ता पूरी तरह बंद भी नहीं किया है। संगठन के नेता रांका से जब पूछा गया कि क्या CJP आगे राजनीतिक पार्टी बन सकती है, तो उनका जवाब था—“Never say no.” साथ ही उन्होंने साफ किया कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारना है और जब तक इसमें बदलाव नहीं आता, आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

यही बयान आने वाले दिनों की राजनीति के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है। 36 दिनों के आंदोलन ने एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा देखा; अब CJP जंतर-मंतर की ताकत को देशभर के युवाओं के बीच स्थायी जनआंदोलन में बदलने की कोशिश कर रही है। यदि संगठन ऐसा करने में सफल होता है तो पेपर लीक से शुरू हुई यह लड़ाई शिक्षा सुधार से आगे बढ़कर युवाओं की राजनीतिक और सामाजिक लामबंदी का नया मंच भी बन सकती है।

फिलहाल CJP का संदेश साफ है—धरना खत्म हुआ है, आंदोलन नहीं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजिल नहीं, पहला पड़ाव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *