राष्ट्रीय/शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अक्टूबर 2026
जामिया में छात्रसंघ चुनाव छात्रों का अधिकार, प्रशासन नहीं छीन सकता
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से कैंपस छावनी बना हुआ है, 18 दिनों से पढ़ाई ठप है और छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। बिजली काटने, गेट सील करने, भोजन-पानी बंद करने, शौचालयों में पानी रोकने और शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जामिया प्रशासन, सुरक्षा गार्डों, पुलिस तथा आईटीबीपी के जवानों की बदसलूकी के बीच विद्यार्थियों का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित है।
जामिया के मौजूदा हालात को लेकर छात्रसंघ चुनाव की तत्काल घोषणा, कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रो. महताब आलम रिजवी की बर्खास्तगी तथा दोनों अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, सेवा रिकॉर्ड और व्यक्तिगत फाइलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है। छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार छीनकर विश्वविद्यालय को बंदिशों में जकड़ना और उन्हें गैर-जरूरी विवादों में उलझाकर शिक्षा को बर्बाद करना अस्वीकार्य है।
शिक्षा के मंदिर पर तालाबंदी, विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़
शिक्षा के मंदिर पर तालाबंदी करके विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले वीसी और रजिस्ट्रार को केंद्र सरकार तत्काल बर्खास्त करे। विद्यार्थियों की जिंदगी को जेल से भी बदतर बना दिया गया है। सरकार मूकदर्शक न बने। छात्रसंघ चुनाव की घोषणा हो, पढ़ाई बहाल हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
छात्रसंघ चुनाव की तत्काल घोषणा हो
छात्रसंघ चुनाव छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। जामिया प्रशासन यह अधिकार विद्यार्थियों से नहीं छीन सकता। चुनाव कार्यक्रम तत्काल घोषित किया जाए, ताकि छात्र अपने प्रतिनिधि चुन सकें और अपनी समस्याएं लोकतांत्रिक तरीके से उठा सकें। विश्वविद्यालय का काम शिक्षा देना और समस्याओं का समाधान करना है, न कि छात्रों को विवादों में उलझाकर उनका भविष्य बर्बाद करना।
बिजली, भोजन, पानी और शौचालय बंद—छात्रों की जिंदगी संकट में
कैंपस में बिजली काटने, गेट सील करने, भोजन-पानी बंद करने और शौचालयों में पानी रोकने से विद्यार्थियों की बुनियादी जरूरतें प्रभावित हुई हैं। मांग है कि सभी सुविधाएं तत्काल बहाल की जाएं और छात्रों के साथ बदसलूकी बंद हो। शांतिपूर्वक अपनी मांग रखने वाले विद्यार्थियों को डर और दबाव के बजाय सम्मान मिलना चाहिए।
24 नवंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं, दिसंबर में ऑनलाइन परीक्षाएं
28 अक्टूबर को रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, ऑनलाइन कक्षाएं 24 नवंबर तक चलेंगी। प्रैक्टिकल, फील्ड वर्क, प्रोजेक्ट और वाइवा 25 से 30 नवंबर तक तथा थ्योरी परीक्षाएं 1 से 24 दिसंबर तक ऑनलाइन होंगी।
ऑनलाइन कार्यक्रम नियमित शैक्षणिक माहौल का विकल्प नहीं है। छात्रों को कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों तक सामान्य पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
ऑनलाइन परीक्षाओं से विज्ञान शिक्षकों के सामने प्रायोगिक परीक्षा की बड़ी चुनौती
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन संचालित करने के फैसले ने शिक्षकों के सामने भी गंभीर व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विज्ञान संकाय के उन विषयों में, जहां प्रयोगशालाओं, उपकरणों और प्रत्यक्ष प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है, प्रायोगिक परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित करना आसान नहीं है।
इससे विद्यार्थियों के वास्तविक कौशल के निष्पक्ष मूल्यांकन, प्रयोगों के प्रदर्शन और परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। शिक्षकों की चिंता केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि ऑनलाइन व्यवस्था में व्यावहारिक शिक्षा के निर्धारित मानकों को कैसे बनाए रखा जाए।
जामिया में शिक्षक संघ का अभाव, शिक्षकों की सामूहिक आवाज और अधिकारों पर सवाल
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सक्रिय और प्रभावी शिक्षक संघ का न होना शिक्षकों की सामूहिक आवाज, उनके अधिकारों और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संस्थागत संवाद को कमजोर करता है। शिक्षक संघ केवल शिक्षकों की समस्याएं उठाने वाला मंच नहीं, बल्कि शैक्षणिक नीतियों, सेवा संबंधी मामलों और विश्वविद्यालय के प्रशासनिक फैसलों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी होता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत के आदेश के बाद शिक्षक संघ के गठन की दिशा में एक समिति बनाई गई थी, लेकिन उसकी कार्यवाही, निष्कर्षों और संघ के गठन की मौजूदा स्थिति पर अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
यह स्थिति कई अहम सवाल खड़े करती है। समिति ने अब तक क्या प्रगति की? उसकी रिपोर्ट कहां है? शिक्षक संघ के गठन में देरी क्यों हो रही है?
विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, समिति की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए और शिक्षक संघ के गठन की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए। शिक्षकों की आवाज को संस्थागत मंच देना विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल, शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही के लिए जरूरी है।
छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल की व्यवस्था सुनिश्चित हो
छात्राओं के हॉस्टल, सुरक्षित आवास, भोजन, पानी और स्वच्छता की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है। छात्राओं और उनके अभिभावकों को अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जा सकता। सभी जरूरी सुविधाओं की गारंटी दी जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्राओं की सुरक्षा तथा उनकी बुनियादी जरूरतों से किसी तरह का समझौता न हो।
वीसी-रजिस्ट्रार की नियुक्ति और पदोन्नति की जांच हो
कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रो. महताब आलम रिजवी की नियुक्ति और पदोन्नति निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं, उनकी व्यक्तिगत सेवा फाइलों में क्या दर्ज है और पूर्व में कोई शिकायत या जांच हुई थी या नहीं—इन सभी पहलुओं की दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
किसी अनियमितता, गंभीर लापरवाही या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मोदी सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे
केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से जामिया की शैक्षणिक व्यवस्था, कैंपस की पाबंदियों, छात्रावासों और बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा कराने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। कुलपति और रजिस्ट्रार की तत्काल बर्खास्तगी की मांग भी दोहराई गई है।
जामिया को बंदिशें नहीं, शिक्षा, संवाद और छात्रसंघ चुनाव चाहिए। 18 दिनों से ठप पढ़ाई, भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों और बुनियादी सुविधाओं के संकट का तत्काल समाधान जरूरी है। छात्रसंघ चुनाव की घोषणा हो, पढ़ाई बहाल हो और छात्रों के अधिकार, सुरक्षा तथा सम्मान सुनिश्चित किए जाएं।



