राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अक्टूबर 2026
टाटा समूह को लेकर राहुल गांधी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सीतारमण ने राहुल गांधी को हर मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की सलाह दी, तो राहुल ने सीधे उनसे सवाल पूछते हुए जवाब दिया—आखिर ऐसा कौन-सा कानूनी या कारोबारी मामला था, जिसके लिए टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस को अमित शाह के आवास पर बुलाया गया?
राहुल का यह जवाब टाटा समूह को लेकर उनके पहले ट्वीट पर वित्त मंत्री की प्रतिक्रिया के बाद आया। राहुल ने आरोप लगाया था कि टाटा समूह को आपराधिक तरीके से नुकसान पहुंचाया जा रहा है और देश के कारोबारी इस पर बोलने से डर रहे हैं।
राहुल के दो सीधे सवाल—बैठक क्यों और किसके लिए?
निर्मला सीतारमण को जवाब देते हुए राहुल गांधी ने लिखा:
“आखिर किस ‘कानूनी और कारोबारी मामले’ के लिए टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस को अमित शाह के आवास पर बुलाया गया था?”
राहुल ने अपने दूसरे सवाल में तंज कसते हुए पूछा कि ‘क्रोनी नंबर-1’ आखिर कब इस खेल में उतरेगा और टाटा की कौन-सी संपत्तियां उसके हाथ लगेंगी?
राहुल ने यह भी कहा कि देश के तीन-चार करीबी कारोबारियों को छोड़कर बाकी भारतीय कारोबारी सरकार से पहले ही नाराज हैं और उन्हें किसी के उकसावे की जरूरत नहीं है।
राहुल के इन सवालों का केंद्र टाटा समूह से जुड़े कारोबारी हितों और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका है। हालांकि, अमित शाह के आवास पर बैठक का उद्देश्य क्या था और क्या उसका टाटा समूह के कारोबारी मामलों से कोई संबंध था, इस पर संबंधित पक्षों का स्पष्ट जवाब सामने आना महत्वपूर्ण होगा। राहुल के सवाल अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं हैं।
पहले ट्वीट में राहुल ने सरकार पर साधा था निशाना
इस विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के उस ट्वीट से हुई, जिसमें उन्होंने लिखा था कि टाटा समूह को “आपराधिक तरीके से तबाह” किया जा रहा है और कोई भी कारोबारी नेता इसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा।
राहुल ने कारोबारियों से सवाल किया कि वे आखिर कब तक चुप रहेंगे—क्या तब तक, जब तक उनका कारोबार भी उनके हाथ से नहीं निकल जाता? उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का निजी खिलौना नहीं है और इस मामले में न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
राहुल के इस बयान ने सरकार और उद्योग जगत के संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
निर्मला सीतारमण ने राहुल को क्या जवाब दिया?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी को नसीहत दी कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें हर मुद्दे का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी कानूनी या व्यावसायिक मामले को बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक करार देना उचित नहीं है।
सीतारमण ने कांग्रेस के शासनकाल की लाइसेंस-कोटा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इससे उद्यमियों की स्वतंत्रता बाधित हुई और गरीबी बढ़ी। इसके विपरीत, उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों को उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन के लिए अनुकूल बताया।
वित्त मंत्री ने संविधान और न्यायपालिका का हवाला देते हुए राहुल से तथ्यों के आधार पर सवाल उठाने को कहा। उन्होंने तंज किया कि राहुल को हर जगह साजिश नजर आने से बचना चाहिए।
कांग्रेस ने नीचे उठाया ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
निर्मला सीतारमण के बयान पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया। पार्टी ने कहा कि वित्त मंत्री लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की बात कर रही हैं, लेकिन चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर जवाब नहीं दे रही हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर पारदर्शी जवाब देने की मांग की। पार्टी का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं, तो उनका समाधान तथ्यों और स्पष्ट जवाबों के जरिए होना चाहिए।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि बेरोजगारी, किसानों की परेशानी और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाना जरूरी है और आर्थिक विकास के दावे लोकतांत्रिक जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकते।
अब सवालों के जवाब का इंतजार
टाटा समूह को लेकर राहुल गांधी के सवालों और निर्मला सीतारमण के जवाब ने राजनीतिक टकराव को नया मोड़ दिया है। इस विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस की अमित शाह के आवास पर बैठक किस संदर्भ में हुई थी और क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है। राहुल के आरोपों और सरकार के जवाब के बीच बहस जारी है। आरोपों की सच्चाई स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों के तथ्यात्मक जवाब जरूरी हैं।



