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CEC नियुक्ति कानून पर बहस दबाकर बिल पास कराया गया — TMC सांसद कीर्ति आजाद का केंद्र सरकार पर हमला

नई दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | 9 मई 2026

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पूर्व क्रिकेटर Kirti Azad ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि 12 दिसंबर 2023 को राज्यसभा में इस विधेयक पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने दी गई और सरकार ने जल्दबाजी में बिल पारित करा दिया। कीर्ति आजाद ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा के लिए 6 घंटे निर्धारित किए गए थे, लेकिन सरकार ने बहस को लगभग 3.5 घंटे में समेट दिया और उसी दिन विधेयक पारित करा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संसदीय बहस की परंपरा को नुकसान पहुंचा।

अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान कानून के तहत चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि नियुक्ति प्रणाली में बदलाव नहीं हुआ तो चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है।

कीर्ति आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का भी जिक्र किया। दरअसल, शीर्ष अदालत ने हाल ही में पूछा था कि क्या CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर संसद में “उचित बहस” हुई थी। अदालत ने 2023 के अपने अनूप बरनवाल फैसले की भावना का हवाला देते हुए यह सवाल उठाया था कि क्या संसद में उस फैसले के मूल सिद्धांतों पर गंभीर चर्चा हुई थी या नहीं।

सुप्रीम Court के 2023 के फैसले में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की समिति का प्रावधान किया गया था। बाद में केंद्र सरकार ने नया कानून लाकर चयन समिति में CJI की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया। इसी बदलाव को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं।

तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तथा पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं केंद्र सरकार का पक्ष है कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है और नई व्यवस्था संविधान के अनुरूप है।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक और संवैधानिक बहस का रूप ले लिया है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है।

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