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NEET पेपर लीक में गिरफ्तार दिनेश बिंवाल पर सियासी संग्राम, कांग्रेस ने बताया बीजेपी नेता

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | जयपुर/नई दिल्ली | 13 मई 2026

देशभर में चर्चा का विषय बने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। राजस्थान से गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिंवाल को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि दिनेश बिंवाल भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ नेता है और उसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। वहीं बीजेपी की ओर से इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजस्थान में NEET पेपर लीक मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए दिनेश बिंवाल का नाम सामने आने के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया और प्रेस बयानों के जरिए बीजेपी पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने कुछ पोस्टर और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें दिनेश बिंवाल खुद को बीजेपी नेता बताते हुए नजर आ रहा है। पार्टी का आरोप है कि यही राजनीतिक संबंध इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण देने का कारण बने।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने भी इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यदि दिनेश बिंवाल बीजेपी से जुड़ा हुआ पदाधिकारी है, तो यह समझना मुश्किल नहीं कि राज्य सरकार शुरुआत में इस मामले में एफआईआर दर्ज करने से क्यों बच रही थी। गहलोत ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने युवाओं के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मामले को दबाने का प्रयास किया।

कांग्रेस ने अपने बयान में दावा किया कि दिनेश बिंवाल ने कथित तौर पर 30 लाख रुपये में NEET UG 2026 का पेपर हासिल किया और फिर उसे कई छात्रों और नेटवर्क से जुड़े लोगों को लाखों रुपये लेकर बेचा। आरोप है कि प्रश्नपत्र और “गेस पेपर” सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और निजी ग्रुपों में भी साझा किए गए। कांग्रेस ने इसे “पेपर लीक माफिया और राजनीतिक संरक्षण” का मामला बताया है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा राजस्थान के सीकर से हुआ, जहां एक हॉस्टल संचालक को परीक्षा से पहले कथित गेस पेपर मिला था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा खत्म होने के बाद जब शिक्षकों ने उस गेस पेपर का मिलान वास्तविक प्रश्नपत्र से किया तो बड़ी संख्या में सवाल समान पाए गए। बताया गया कि केमिस्ट्री सेक्शन में 108 में से 45 सवाल और बायोलॉजी में 204 में से करीब 90 सवाल हूबहू मेल खाते थे। इसके बाद मामला तेजी से बढ़ा और जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं।

जानकारी के अनुसार, हॉस्टल संचालक और शिक्षकों ने इस मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस से की थी, लेकिन शुरुआत में मामला दर्ज नहीं किया गया। बाद में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी National Testing Agency को ईमेल भेजा गया, जिसके बाद पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया। अब इस प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसियों और विभिन्न राज्य पुलिस इकाइयों द्वारा की जा रही है।

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के लाखों छात्र और अभिभावक परेशान हैं। छात्रों का कहना है कि लगातार दूसरे वर्ष परीक्षा प्रणाली विवादों में घिरने से उनका मानसिक तनाव बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने इसे “परीक्षा व्यवस्था की विफलता” बताते हुए केंद्र सरकार और NTA पर सवाल उठाए हैं।

इस बीच डॉक्टरों के संगठन FAIMA ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और NTA को बदलने, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार तथा न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है। पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन भी जारी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NEET पेपर लीक मामला अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है। राजस्थान सहित कई राज्यों में विपक्ष सरकार पर “पेपर माफिया को संरक्षण” देने का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्तापक्ष जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहा है।

फिलहाल जांच एजेंसियां दिनेश बिंवाल और उससे जुड़े नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। यह भी जांच की जा रही है कि पेपर लीक का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कितने लोग शामिल थे। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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