बिजनेस | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 मई 2026
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा ईंधन बचाने की अपील और केंद्र सरकार के हालिया संकेतों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी, पश्चिम एशिया में तनाव और भारत की बढ़ती आयात निर्भरता को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो सरकार और तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
स्थिति को और गंभीर बना रहा है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बना तनाव। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री गतिविधियों में व्यवधान के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दिखाई दे रहा है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय बनता जा रहा है।
सरकार ने हाल ही में सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाले टैक्स में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। आर्थिक विशेषज्ञ इसे विदेशी मुद्रा बचाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार आयात बिल को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है ताकि बढ़ते वैश्विक दबाव का असर अर्थव्यवस्था पर कम पड़े।
तेल कंपनियों का दावा है कि मौजूदा हालात में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखने के कारण कंपनियों को प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये तक का घाटा हो रहा है। अब तक तेल कंपनियां यह बोझ खुद उठा रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसा करना संभव नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की बात कही थी। इसके बाद कई राज्य सरकारों ने भी ईंधन बचत से जुड़े अभियान शुरू किए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह भविष्य में संभावित सख्त कदमों का संकेत हो सकता है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने भी हाल के बयान में कहा कि देश में फिलहाल पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री की अपील को “वेकअप कॉल” की तरह लेना चाहिए। उनके इस बयान ने बाजार और आम लोगों के बीच आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
इस बीच प्रसिद्ध उद्योगपति और बैंकिंग विशेषज्ञ Uday Kotak ने भी चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है। उनका कहना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो कच्चा तेल महंगा होगा, रुपया कमजोर पड़ेगा और महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव परिवहन लागत, खाद्य पदार्थों की कीमत, उद्योगों की लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी पड़ता है। यही कारण है कि सरकार अब तक आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचती रही है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में कुछ वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है। इसके अलावा भविष्य में ईंधन खपत को नियंत्रित करने के लिए सरकार कुछ नए नियम या सीमाएं भी लागू कर सकती है।
देश इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां वैश्विक राजनीतिक संकट, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल बाजार का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं।




