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ताइवान राष्ट्रपति का सख्त संदेश: “दुनिया से जुड़ने का हक हमारा”, चीन की आपत्ति के बीच अफ्रीका दौरे पर पहुंचे लाई चिंग-ते

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ताइपे/म्बाबाने | 4 मई 2026

ताइपे/म्बाबाने। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने एक बार फिर चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि ताइवान को दुनिया से जुड़ने का पूरा अधिकार है और कोई भी देश उसे रोक नहीं सकता। उन्होंने यह बयान अफ्रीकी देश एस्वातिनी के दौरे के दौरान वहां के राजा मस्वाती तृतीय से मुलाकात के बाद दिया।

लाई चिंग-ते का यह दौरा पहले से घोषित नहीं था और इसे “सरप्राइज विजिट” माना जा रहा है। खास बात यह है कि ताइवान सरकार का दावा है कि चीन ने इस यात्रा को रोकने की कोशिश की थी। ताइवान के अनुसार, चीन के दबाव के चलते हिंद महासागर क्षेत्र के तीन देशों ने राष्ट्रपति के विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

इसके बावजूद ताइवान के राष्ट्रपति एस्वातिनी पहुंचने में सफल रहे, जो अफ्रीका का एक छोटा लेकिन ताइवान का महत्वपूर्ण सहयोगी देश है। एस्वातिनी उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जो अब भी ताइवान को आधिकारिक तौर पर मान्यता देते हैं। वर्तमान में ऐसे देशों की संख्या केवल 12 रह गई है।

राजा मस्वाती तृतीय के सत्ता संभालने के 40 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे लाई चिंग-ते ने कहा कि ताइवान वैश्विक मंच पर अपनी पहचान और साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी ताइवान का अधिकार है और इसे किसी भी दबाव से रोका नहीं जा सकता।

चीन ने इस दौरे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने लाई चिंग-ते को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें अपमानजनक शब्दों में संबोधित किया और इस यात्रा की निंदा की। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और किसी भी देश के साथ उसके आधिकारिक संबंधों का विरोध करता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ताइवान और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ताइवान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि चीन उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने में जुटा है।

यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है—जिसके जरिए ताइवान यह दिखाना चाहता है कि वह वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बनाए रखने के लिए सक्रिय है, चाहे उस पर कितना भी दबाव क्यों न हो। ताइवान और चीन के बीच खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या ताइवान अपने सीमित लेकिन अहम कूटनीतिक रिश्तों को बनाए रख पाता है।

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