खेल | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 मई 2026
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के इतिहास में एक और बड़ी डील ने क्रिकेट और कॉरपोरेट दुनिया दोनों में हलचल मचा दी है। लोकप्रिय फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स अब नए मालिकों के हाथों में जाने वाली है। स्टील उद्योग के दिग्गज लक्ष्मी एन मित्तल, उनके बेटे आदित्य मित्तल और उद्योगपति अदार पूनावाला ने मिलकर इस टीम को करीब 1.65 अरब डॉलर में खरीदने का समझौता किया है। यह सौदा न सिर्फ एक टीम की खरीद है, बल्कि आईपीएल की तेजी से बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक आकर्षण का बड़ा संकेत भी माना जा रहा है।
राजस्थान रॉयल्स की यात्रा भी बेहद दिलचस्प रही है। साल 2008 में आईपीएल की शुरुआत के दौरान मनोज बडाले ने इस टीम को महज 67 मिलियन डॉलर में खरीदा था। उस समय इसकी इतनी बड़ी वैल्यू की कल्पना भी नहीं की गई थी। लेकिन अब करीब दो दशकों में यह फ्रेंचाइजी 1.65 अरब डॉलर की हो गई है, जो आईपीएल के बढ़ते ब्रांड वैल्यू और बाजार विस्तार को साफ दर्शाती है।
डील के अनुसार मित्तल परिवार के पास लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूनावाला करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख साझेदार बनेंगे। शेष हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास रहेगी, जिनमें मनोज बडाले भी शामिल हैं। यानी टीम में अनुभव और नए निवेश का संतुलन देखने को मिलेगा।
इस सौदे की खास बात यह है कि यह सिर्फ आईपीएल टीम तक सीमित नहीं है। इसके साथ दक्षिण अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स और कैरेबियन की बारबाडोस रॉयल्स भी शामिल हैं। इसका मतलब साफ है कि यह एक मल्टी-नेशनल क्रिकेट नेटवर्क का अधिग्रहण है, जो फ्रेंचाइजी क्रिकेट के ग्लोबल मॉडल को और मजबूत करता है।
मित्तल परिवार जैसे बड़े औद्योगिक समूह की एंट्री से राजस्थान रॉयल्स को नई वित्तीय ताकत मिलेगी। इससे टीम के इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा एनालिटिक्स, ट्रेनिंग सिस्टम और टैलेंट डेवलपमेंट में बड़े निवेश की उम्मीद है। वहीं अदार पूनावाला की मौजूदगी से स्पोर्ट्स साइंस और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इस डील का असर सिर्फ राजस्थान रॉयल्स तक सीमित नहीं रहेगा। यह आईपीएल की अन्य फ्रेंचाइजियों की वैल्यूएशन को भी ऊपर ले जा सकता है। निवेशकों के लिए आईपीएल अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक हाई-रिटर्न ग्लोबल बिजनेस प्लेटफॉर्म बन चुका है।
फैंस के नजरिए से यह बदलाव काफी दिलचस्प है। नए मालिकों के आने के बाद टीम की रणनीति, खिलाड़ी चयन, सपोर्ट स्टाफ और फैन एंगेजमेंट में बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे टीम में नई ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ने की उम्मीद है।
यह सौदा अभी अंतिम चरण में है। इसे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), आईपीएल गवर्निंग काउंसिल और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी मिलना बाकी है। उम्मीद है कि 2026 की तीसरी तिमाही तक सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी।
राजस्थान रॉयल्स की यह डील आईपीएल के बदलते स्वरूप का प्रतीक है। यह दिखाता है कि क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि अरबों डॉलर का वैश्विक उद्योग बन चुका है—जहां हर बड़ा निवेशक अपनी हिस्सेदारी चाहता है। अब नजर इस बात पर होगी कि नए मालिकों के साथ राजस्थान रॉयल्स मैदान और बाजार—दोनों जगह कितनी बड़ी छलांग लगाती है।




